द्रमुक परिसीमन पर विधेयक का अध्ययन कर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेगी

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द्रमुक परिसीमन पर विधेयक का अध्ययन कर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेगी

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 05:17 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 05:17 PM IST

चेन्नई, 17 जुलाई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने शुक्रवार को कहा कि जब प्रस्तावित परिसीमन से जुड़ा विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, तो वह उसका अध्ययन करेगी और तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए ‘गुण-दोष’ के आधार पर निर्णय लेगी।

पार्टी सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जब विधेयक के दायरा और मकसद का पता चलेगा, तो उसका विश्लेषण किया जाएगा और निर्णय लिया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि राज्य के हितों की रक्षा के लिए द्रमुक का फैसला स्वतंत्र और गुण-दोष पर आधारित होगा।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को यह जानकारी मिली है कि परिसीमन पर प्रस्तावित विधेयक एक अलग कानून होगा, न कि इससे जुड़े कानूनों के किसी समूह का हिस्सा।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि सीट में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी और राज्यों के बीच सीट के बंटवारे के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा चल रही है।

उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को हुई पार्टी सांसदों की बैठक में परिसीमन मुद्दे पर भी चर्चा हुई तथा लंदन में मौजूद द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक को संबोधित किया।

द्रमुक ने परिसीमन की प्रक्रिया का उसके पिछले रूप में कड़ा विरोध किया था। इस सिलसिले में संविधान संशोधन विधेयक अप्रैल में संसद में पारित नहीं हो पाया था।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव हारने पर द्रमुक के सत्ता से बाहर होने के बाद लंबे समय से उसकी सहयोगी रही कांग्रेस पार्टी ने उसका (द्रमुक का) साथ छोड़कर टीवीके का दामन थाम लिया।

सूत्रों ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में द्रमुक इस मामले पर खुद ही निर्णय लेगी तथा कांग्रेस पार्टी से कोई चर्चा नहीं करेगी।

द्रमुक के आधिकारिक मुखपत्र ‘मुरासोली’ ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के सांसदों की आवाज संसद में गूंजेगी, ताकि राज्य के अधिकारों की रक्षा की जा सके और संविधान की गरिमा एवं मूल्यों को बनाए रखा जा सके।

पार्टी प्रमुख स्टालिन की अगुवाई में बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सांसदों की बैठक में इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया गया।

जब लोकसभा में 17 अप्रैल को संविधान संशोधन बिल गिर गया था, तो द्रमुक प्रमुख एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा था, ‘‘हमने कभी भी परिसीमन का विरोध नहीं किया। हमने निष्पक्षता की मांग की थी, एक ऐसी प्रक्रिया की मांग की थी जिस पर सलाह-मशविरा हो, सोच-विचार हो और जिस पर सहमति बनी हो। न कि ऐसी प्रक्रिया जो राजनीतिक फ़ायदे के लिए थोपी गई हो।’’

इसके अलावा, द्रमुक प्रमुख ने कहा था कि परिसीमन प्रतिनिधित्व के बारे में है, इस बारे में है कि भारत के लोकतंत्र में किसे आवाज़ मिलेगी। उन्होंने कहा था, ‘‘इससे भारत संघ को मजबूती मिलनी चाहिए, न कि उसका संतुलन बिगड़ना चाहिए।’’

स्टालिन ने नमक्कल में 16 अप्रैल को काला झंडा फहराया था और परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई थी। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ करार देते हुए आरोप लगाया कि यह तमिल लोगों को उनकी ही भूमि में ‘शरणार्थी’ बनाने का प्रयास है।

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक राजनीतिक चर्चा के मुख्य विषय रहे। विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को हुए और नतीजे चार मई को घोषित किए गए।

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश