महिला आरक्षण कानून के संबंध में द्रमुक का तर्क भय फैलाने वाला : कुमारस्वामी

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महिला आरक्षण कानून के संबंध में द्रमुक का तर्क भय फैलाने वाला : कुमारस्वामी

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 05:20 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 05:20 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए लाये गए विधेयकों के संबंध में द्रमुक मुनेत्र कणगम (द्रमुक) सदस्यों के तर्कों को ‘‘भय फैलाने वाला’’ बताते हुए शुक्रवार को कहा कि ये दक्षिणी राज्यों के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान, कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता खो दी है और अब वह द्रमुक के विमर्श के अनुसार चल रही है।

कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व में तर्क दिया था कि आरक्षण जातिगत जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए, लेकिन वह संसदीय प्रतिनिधित्व के मामले में इसे लागू नहीं करना चाहते।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘राहुल गांधी ने कुछ समय पहले खुद को (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री) एम.के. स्टालिन का छोटा भाई बताया था, लेकिन ऐसा लगता है कि सीट बंटवारे के विवाद के बाद बड़ा भाई, छोटे भाई से नाराज है। छोटा भाई अभी भी बड़े भाई से कुछ स्नेह की उम्मीद कर रहा है…।’’

इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक सदस्य ए. राजा ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के नाम पर भजापा नीत केंद्र सरकार भेदभाव, उत्तर-दक्षिण विभाजन और ‘‘एक राष्ट्र, एक भाषा, एक संस्कृति’’ को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी संसद को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ये विधेयक संविधान और सहकारी संघवाद पर एक स्पष्ट हमला हैं। उन्होंने सवाल किया कि विधेयक में परिसीमन को परिभाषित क्यों नहीं किया गया है।

भाषा सुभाष वैभव

वैभव