Donation for Iran in India: यहां 25 हजार रुपये में नीलाम हुआ 10 रुपये का एक अंडा.. ईरान के लोगों के लिए जानें कहाँ दिल खोलकर दान कर रहे लोग..

Donation for Iran in India: कश्मीर और कारगिल में ईरान के लिए दान, 10 रुपये का अंडा 25 हजार में नीलाम।

Donation for Iran in India: यहां 25 हजार रुपये में नीलाम हुआ 10 रुपये का एक अंडा.. ईरान के लोगों के लिए जानें कहाँ दिल खोलकर दान कर रहे लोग..

Donation for Iran in India || Image- ANI News File Image

Modified Date: April 6, 2026 / 08:28 am IST
Published Date: April 6, 2026 8:28 am IST
HIGHLIGHTS
  • 10 रुपये का अंडा 25 हजार में नीलाम
  • ईरान के लिए जुटाए जा रहे करोड़ों रुपये
  • लोग गहने और वाहन तक कर रहे दान

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख इलाके में रहने वाले शिया मुस्लिमों के बीच ईरान के अलग और उनकी हिफाजत के लिए चिंताएं कम नहीं हो रही है। इसे इस बात से ही समझा सकता ही कि, घाटी में अब तक इस समुदाय ने ईरान के मदद के लिए अब तक करोड़ो रुपये इकट्ठे कर लिए है। (Donation for Iran in India) कोई अपनी बचत ईरान को देना चाहता है तो महिलायें अपने गहने और जेवर बेचकर पैसे और मदद इकट्ठा कर रही है। इसी बीच एक चौंकाने वाली नीलामी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।

25000 में नीलाम हुआ एक अंडा

धन जुटाने के लिए शिया समुदाय के लोग नई नई तरकीबें अपना रहे है। इस बीच एक मामूली अंडे की नीलामी करीब 25000 रुपये में हुई है। अंडे खरीदने वाले शख्स का नाम शब्बीर हुसैन है। शब्बीर ने इस बारें में बताया की, “सब जानते हैं कि एक अंडे की कीमत 10 रुपये होती है। मैंने 25 हजार रुपये इसलिए नहीं दिए क्योंकि मेरे पास थे। इससे हमें यह संदेश मिलता है कि ईरान में बच्चों पर कितना अत्याचार हो रहा है। इसलिए मैंने उनके लिए 25 हजार रुपये दिए। हम अपनी जान देने को तैयार हैं। हम इस समुदाय के लिए जिएंगे। हमें अपने नेता के हर आदेश का पालन करना होगा। अभी तक हमारे नेता ने हमें कोई आदेश नहीं दिया है।

1,25,000 रुपये में बिकी मुर्गी

बता दें कि, सप्ताह भर पहले इसी तरह एक मुर्गी की भी नीलामी की गई थी। (Donation for Iran in India) दरअसल कारगिल इलाके में नीलामी में मुर्गे को एक स्थानीय निवासी ने 1,25,000 रुपये में खरीदा था।

गाड़ी, सायकिल और बर्तन भी दान कर रहे है लोग

हैरानी की बात यह है कि, इन अभियानों के लिए स्थानीय लोग केवल नकद ही नहीं, बल्कि आभूषण, बर्तन, जानवर और यहां तक कि मोटरसाइकिल, कार और साइकिल जैसे वाहन भी दान कर रहे हैं। दान शिविरों में हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कठिन समय में ईरान के लोगों के साथ खड़ा होना उनका नैतिक कर्तव्य है। समाजसेवियों और आयोजकों के अनुसार, इस तरह के अभियानों से न सिर्फ राहत राशि जुटाई जा रही है, बल्कि आपसी एकजुटता और मानवीय मूल्यों को भी मजबूती मिल रही है।

गौरतलब है कि, जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शिया मुस्लिम निवास करते है। युद्ध के शुरुआत में जब ईरानी सुप्रीमो अयातुल्लाह ख़ामेनेई की मौत हुई थी तो इस इलाके में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। लोगों ने सड़कों पर उतारकर शोक भी मनाया था। दावा किया गया था कि, समुदाय ने कुछ ही दिनों में ईरान की मदद के लिए करोड़ो रुपये इकट्ठे कर लिए थे।

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