छत्रपति संभाजीनगर, 29 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के पशुपालन विभाग ने क्षेत्र में सूखे की स्थिति के बीच चारे के आसन्न संकट को देखते हुए मवेशियों की संख्या और उपलब्ध चारे के भंडार का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि महीने भर चलने वाले इस सर्वेक्षण में पूरे क्षेत्र में चारे की कमी का आकलन किया जाएगा, क्योंकि पारंपरिक चारा उत्पादन का क्षेत्र घट गया है और पड़ोसी राज्य कर्नाटक एवं तेलंगाना भी इसी तरह मानसून की कमी से जूझ रहे हैं।
विभाग के संयुक्त आयुक्त डॉ. पुंडलीक बोरकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कम बारिश के कारण महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। चारे की कमी हो सकती है। पशुपालन विभाग ने मवेशियों और उपलब्ध चारे के भंडार का नए सिरे से सर्वेक्षण शुरू किया है।’’
उन्होंने कहा कि एक महीने में रिपोर्ट तैयार कर सरकार के समक्ष पेश की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर बारिश के बड़े दौर नहीं आते हैं, तो चारे की कमी होने की आशंका है। किसान अपने खेतों के एक हिस्से में ज्वार, बाजरा और मक्का बोया करते थे और ये फसलें मवेशियों के चारे के रूप में काम आती थीं। लेकिन अब यह क्षेत्र घट गया है।’’
हालांकि, बोरकर ने कहा कि राज्य सरकार ने चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जहां पानी उपलब्ध है, वहां किसानों को बीज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि चारे का उत्पादन किया जा सके। साथ ही, हमें ऐसे नए स्थानों की तलाश करनी होगी, जहां से चारा खरीदा जा सके, क्योंकि पड़ोसी राज्य कर्नाटक और तेलंगाना भी ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।’’
महाराष्ट्र सरकार ने बारिश की कमी के बीच राज्य की 358 तहसीलों में से 265, यानी 74 प्रतिशत हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया है और फसल ऋण की अदायगी की समयावधि बदलने, भू-राजस्व में रियायत तथा किसानों के लिए बिजली बिल पर सब्सिडी समेत राहत उपायों की घोषणा की है।
भाषा तान्या माधव
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