डूसू चुनाव निष्पक्ष मुकाबला नहीं था; एनएसयूआई अपनी कमियों की समीक्षा करेगी: जाखड़
डूसू चुनाव निष्पक्ष मुकाबला नहीं था; एनएसयूआई अपनी कमियों की समीक्षा करेगी: जाखड़
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने शनिवार को आरोप लगाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव निष्पक्ष मुकाबला नहीं था। साथ ही, उन्होंने कहा कि छात्र संगठन चुनावी मैदान में लौटने से पहले अपनी संगठनात्मक कमियों की समीक्षा करेगा।
डूसू चुनाव के शनिवार को घोषित परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए जाखड़ ने कहा कि संगठन ने ‘‘सामान्य परिवारों’’ से आने वाले उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था और वह छात्रों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करता रहेगा।
डूसू चुनाव में एबीवीपी ने केंद्रीय पैनल के चार पदों में से तीन पर जीत दर्ज की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार यश डबास ने अध्यक्ष पद के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।
जाखड़ ने आरोप लगाया कि चुनाव निष्पक्ष मुकाबला नहीं था और दावा किया कि वरिष्ठ नेताओं तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की भागीदारी एनएसयूआई के खिलाफ रही।
उन्होंने कहा, ‘‘जब प्रधानमंत्री किसी विश्वविद्यालय चुनाव में स्टार प्रचारक बन जाते हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री अपनी पूरी ताकत चुनाव में लगा देती हैं, तो निष्पक्ष लोकतांत्रिक मुकाबले के लिए कुछ नहीं बचता। हर कॉलेज में धांधली हुई और एनएसयूआई को हर जगह रोकने की कोशिश की गई।’’
उन्होंने दावा किया कि एनएसयूआई का मुकाबला केवल एबीवीपी से नहीं था, बल्कि प्रशासन और सत्तारूढ़ व्यवस्था से भी था।
जाखड़ ने कहा, ‘‘अगर यह मुकाबला केवल एबीवीपी के खिलाफ होता, तो हम आराम से जीत जाते। हमारी लड़ाई पूरे प्रशासन, सत्तारूढ़ ताकत और देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ थी।’’
उन्होंने कहा कि संगठन अपनी कमियों की समीक्षा करेगा, जरूरी सुधार करेगा और नए संकल्प के साथ चुनावी मैदान में लौटेगा।
जाखड़ ने सभी निर्वाचित उम्मीदवारों को बधाई दी और उनसे छात्र मुद्दों पर काम करने तथा चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को पूरा करने का आग्रह किया।
जाखड़ ने कहा, ‘‘हमारी एकमात्र उम्मीद यही है कि चूंकि छात्रों ने आपको चुना है, इसलिए आप उनकी समस्याओं पर काम करें और उनसे किए गए वादों को पूरा करें।’’
भाषा आशीष माधव
माधव

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