डूसू नतीजे: एबीवीपी ने ‘जेन जी’ विरोध और सत्य निकेतन हादसे की चुनौतियों के बीच कायम रखा दबदबा
डूसू नतीजे: एबीवीपी ने ‘जेन जी’ विरोध और सत्य निकेतन हादसे की चुनौतियों के बीच कायम रखा दबदबा
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में शानदार जीत दर्ज की और युवाओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी।
एबीवीपी को यह जीत जंतर-मंतर पर ‘जेन जी’ के प्रदर्शन के तीन महीने बाद और हाल में सत्य निकेतन हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय के पांच छात्रों की मौत के बाद आई चुनौतियों के बीच मिली है।
एबीवीपी ने डूसू पैनल में एक पद को छोड़कर सभी पदों पर जीत हासिल की। इसके उम्मीदवार यश डबास ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है।
शुक्रवार को हुए चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने कड़ा मुकाबला किया, लेकिन वह डूसू के सभी चार पदों पर हार गया।
एनएसयूआई से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दीपांशु ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के इशु मौर्य को हराया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में परंपरागत रूप से एबीवीपी और कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के बीच सीधा मुकाबला रहा है। एबीवीपी को भाजपा का परोक्ष समर्थन प्राप्त माना जाता है।
एबीवीपी ने तीन पदों पर जीत दर्ज की। डबास ने अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों से हराया। रिया छाबड़ी और लक्ष्य राज सिंह ने क्रमश: सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की।
जून में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की नेता रत्ना सिंह ने कहा कि तीन महीने पहले आंदोलन नीट पेपर लीक मामले में समाधान की मांग को लेकर किया गया था।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद से हम छात्रों और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जैसे राज्यों में स्कूलों की स्थिति। डूसू चुनाव एक अलग मंच था, जिसमें हमने सीधे तौर पर भाग नहीं लिया।’’
भाजपा नेता विजय गोयल, जो 1977-78 में डूसू अध्यक्ष रह चुके हैं, ने कहा कि ‘जेन जी’ का प्रदर्शन भाजपा या केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं था।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जंतर-मंतर प्रदर्शन मूल रूप से नीट पेपर लीक मामले के खिलाफ था, जिसका सरकार ने आखिरकार समाधान कर दिया। यह नहीं कहा जा सकता कि युवा भाजपा या सरकार के खिलाफ थे।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि कांग्रेस संगठन जंतर-मंतर प्रदर्शन से पैदा हुई भावना का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन छात्र उससे प्रभावित नहीं हुए।
डूसू चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर और दक्षिण परिसरों में छात्रों ने उन घटनाओं को लेकर अपनी राजनीतिक जागरूकता दिखाई, जो सीधे तौर पर उन्हें प्रभावित करती हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर से सटे इलाके सत्य निकेतन में छह सितंबर को एक इमारत गिर गई थी, जो चुनाव प्रचार के दौरान एक बड़ा मुद्दा बना। इस हादसे में मारे गए सात लोगों में से पांच कॉलेज छात्र थे।
डूसू उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले दीपांशु इस हादसे के विरोध में जूते-चप्पल पहनना छोड़ने के बाद लोकप्रिय हुए।
छात्रों ने कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन का असर किसी संगठन के सीधे विरोध या समर्थन से अधिक इस बात को लेकर था कि विभिन्न छात्र संगठनों का रुख क्या है और उनके मुद्दों को उठाने का तरीका क्या है।
हिंदू कॉलेज के एक छात्र ने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में छात्रों में असंतोष बढ़ा है। इससे हममें से कई लोगों ने छात्र संगठनों के रुख पर सवाल उठाए और यह जानने की कोशिश की कि क्या वे वास्तव में छात्रों के मुद्दों का प्रतिनिधित्व करते हैं या केवल अपनी पार्टियों की लाइन पर चलते हैं।’’
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और कर्नाटक सह-प्रभारी अजय दत्त ने आरोप लगाया कि भाजपा ने राज्य और राष्ट्रीय चुनावों की तरह डूसू चुनावों को भी ‘‘प्रभावित’’ किया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अध्यक्ष पद के लिए अंतिम दौर की गिनती में हमारा उम्मीदवार करीब 500 मतों से आगे चल रहा था और अंत में उसे हारा हुआ घोषित कर दिया गया। भाजपा ने नतीजों को प्रभावित करने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग किया।’’
वहीं, भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा युवाओं को ‘‘गुमराह करने’’ की पूरी कोशिश किए जाने के बावजूद एबीवीपी की जीत अपने आप में ‘‘बड़ा संदेश’’ देती है।
भाषा शोभना नेत्रपाल
नेत्रपाल

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