धर्मशाला क्षेत्र में भूकंप के कई झटके, कोई क्षति नहीं

धर्मशाला क्षेत्र में भूकंप के कई झटके, कोई क्षति नहीं

धर्मशाला क्षेत्र में भूकंप के कई झटके, कोई क्षति नहीं
Modified Date: June 6, 2026 / 01:01 pm IST
Published Date: June 6, 2026 1:01 pm IST

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश), छह जून (भाषा) धर्मशाला क्षेत्र में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए, जिनमें रिक्टर पैमाने पर 5.0 तीव्रता का एक बड़ा झटका भी शामिल है। यह जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी।

अधिकारियों ने बताया कि इन झटकों से लोगों में दहशत उत्पन्न हो गई, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां पांच जून को दर्ज की गईं, जिनमें सबसे शक्तिशाली झटका रात 10 बजकर चार मिनट पर आया। उन्होंने बताया कि इसका केंद्र धर्मशाला से लगभग 40 किलोमीटर दूर, धौलाधार पर्वतमाला में कांगड़ा-चंबा सीमा पर स्थित धार घडोई और आरएफ कुगती के बीच था।

उन्होंने बताया कि भूकंप का केंद्र 22.5 किलोमीटर की गहराई में था और इसके झटके कांगड़ा, चंबा और आसपास के जिलों में महसूस किए गए। उन्होंने बताया कि लोगों ने तेज कंपन महसूस होने की सूचना दी, जिसके बाद एहतियातन कई निवासी अपने घरों से बाहर निकल आए।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि दिन में पहले ही शुरू हो गईं थी। उन्होंने बताया कि सुबह आठ बजकर 52 मिनट पर धौलाधार पर्वतमाला में मिंकियानी दर्रे के निकट, धर्मशाला से लगभग 16 किलोमीटर दूर 2.3 तीव्रता का हल्का भूकंप दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि इसकी तीव्रता इतनी कम थी कि अधिकांश लोगों को इसका एहसास नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि 5.0 तीव्रता के भूकंप के बाद देर रात दो और झटके दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि रात 11 बजकर तीन मिनट पर धर्मशाला से लगभग 18 किलोमीटर दूर 2.8 तीव्रता का भूकंप आया, जबकि रात 11 बजकर 52 मिनट पर आरएफ हिलंग के निकट, नगर से करीब 23 किलोमीटर दूर 3.0 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया।

उन्होंने बताया कि धर्मशाला जिस कांगड़ा जिले में स्थित है, वह भारत के सर्वाधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल भूकंपीय क्षेत्र-5 (सीस्मिक ज़ोन-5) के अंतर्गत आता है। उन्होंने बताया कि सामान्यतः 3 से 4 तीव्रता वाले भूकंप मामूली माने जाते हैं और उनसे संरचनात्मक क्षति होने की संभावना कम रहती है, हालांकि उनके झटके महसूस किए जाते हैं।

भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, भूगर्भीय दृष्टि से हिमालयी क्षेत्र में बार-बार आने वाले कम तीव्रता के भूकंप भ्रंश रेखाओं (फॉल्ट लाइन) पर संचित विवर्तनिक तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ऐसी गतिविधियां भविष्य में किसी बड़े भूकंप की संभावना को समाप्त नहीं करतीं।

इन झटकों ने वर्ष 1905 के विनाशकारी कांगड़ा भूकंप की यादें ताजा कर दी, जिसे भारत के इतिहास के सबसे घातक भूकंपों में से एक माना जाता है। लगभग 7.8 तीव्रता वाले उस भूकंप में 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और क्षेत्र में एक लाख से अधिक इमारतें नष्ट हो गई थीं।

भाषा अमित वैभव

वैभव


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