(फाइल फोटो के साथ जारी)
ईटानगर, 28 सितंबर (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को कहा कि निर्वाचन आयोग के अपने रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि आयोग का सामूहिक फैसला था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से कई बार यह सवाल उठाए जाने पर कि क्या एसआईआर का फैसला एकतरफा था, खांडू ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस कवायद से संबंधित 24 जून 2025 का आदेश ‘‘आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी’’ से जारी किया गया था।
खांडू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राहुल गांधी ने कई बार सवाल उठाया है कि क्या एसआईआर एकतरफा फैसला था। निर्वाचन आयोग का स्वयं का रिकॉर्ड अब इसका स्पष्ट संस्थागत जवाब देता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आधिकारिक रिकॉर्ड स्पष्ट है। एसआईआर आयोग का फैसला था, किसी एक व्यक्ति का नहीं।’’
खांडू ने यह भी कहा कि एसआईआर से संबंधित बाद के कार्यक्रमों को भी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी और आधिकारिक रिकॉर्ड से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी निर्वाचन आयोग के कामकाज और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आई है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।
निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े उसके फैसले पूरे आयोग की मंजूरी से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान व्यक्त अलग-अलग राय को अलग या एकतरफा फैसला नहीं माना जा सकता।
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है जबकि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया में अपनाई गई कार्यप्रणाली का बचाव कर रहा है।
खांडू ने कहा कि निर्वाचन आयोग का स्पष्टीकरण और उसके आधिकारिक रिकॉर्ड यह स्पष्ट करते हैं कि एसआईआर का फैसला किस तरह लिया गया था।
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा