‘ईसीआईनेट’ विकेंद्रीकृत मंच, क्षेत्रीय अधिकारियों के पास वैधानिक शक्तियां बरकरार: निर्वाचन आयोग

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‘ईसीआईनेट’ विकेंद्रीकृत मंच, क्षेत्रीय अधिकारियों के पास वैधानिक शक्तियां बरकरार: निर्वाचन आयोग

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 10:05 PM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 10:05 PM IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को बताया कि आयोग का ‘ईसीआईनेट’ एक विकेंद्रीकृत मंच है, जहां वैधानिक कार्य केवल निर्धारित चुनाव अधिकारी ही कर सकते हैं।

यह बयान निर्वाचन आयोग के डिजिटल सिस्टम के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच आया है।

ये सवाल ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर के बाद उठे, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के डेटाबेस के ‘‘धीरे-धीरे केंद्रीकरण’’ और राज्यों में अधिकारियों को उपलब्ध पहुंच को लेकर चिंता जताई थी।

अधिकारियों ने बताया कि बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ), सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ‘ईसीआईनेट’ पर अपने-अपने वैधानिक कार्य विशिष्ट आईडी और पासवर्ड के माध्यम से करते हैं।

अधिकारी ने बताया, ‘‘ईसीआईनेट पर कोई अन्य व्यक्ति, यहां तक कि निर्वाचन आयोग का कोई अन्य अधिकारी भी, उनके वैधानिक कार्य नहीं कर सकता।’’ हालांकि, इस मंच की साइबर सुरक्षा की व्यवस्था निर्वाचन आयोग की ओर से केंद्रीय स्तर पर की जाती है।

अधिकारियों ने बताया कि इसे साइबर हमलों से बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना के दिन ऐसे करीब 68 लाख प्रयासों का हवाला दिया।

निर्वाचन आयोग की पहले की मतदाता सूची प्रबंधन प्रणाली ईआरओनेट को अब व्यापक ईसीआईनेट मंच में एकीकृत कर दिया गया है।

आधिकारिक दस्तावेजों में इसे ‘‘ईसीआईनेट पोर्टल का निर्वाचक नामावली मॉड्यूल (पूर्व में ईआरओनेट)’’ कहा गया है।

यह मुद्दा उन खबरों के बाद चर्चा में आया, जिनमें कहा गया था कि गोवा में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 97 मतदाताओं को पात्र पाया लेकिन उनके नाम बहाल नहीं कर सके क्योंकि सॉफ्टवेयर में नाम पुन: दर्ज करने (रोलबैक) का विकल्प उपलब्ध नहीं था।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने अलग से एसआईआर के दौरान नए मतदाताओं से फॉर्म-6 के साथ मांगे गए अतिरिक्त घोषणा पत्र की वैधता को लेकर उठाए गए सवालों को भी खारिज कर दिया।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश