नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) वर्ष 2025 में आर्थिक धोखाधड़ी के जरिये वैश्विक अर्थव्यवस्था से 442 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम निकाल ली गई। इंटरपोल ने सोमवार को जारी अपनी 2026 की वैश्विक आर्थिक धोखाधड़ी खतरा आकलन रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
रिपोर्ट में वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े वैश्विक जोखिम को कुल मिलाकर “उच्च” श्रेणी में रखा गया है।
ल्योन मुख्यालय वाले वैश्विक पुलिस सहयोग संगठन ‘इंटरपोल’ ने कहा कि ठग अब ‘एजेंटिक’ कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो “स्वायत्त रूप से पूरी धोखाधड़ी की योजना बना सकता है और उसे अंजाम दे सकता है, जिसमें प्रारंभिक जानकारी जुटाने से लेकर फिरौती की मांग तक शामिल है।”
सोमवार को जारी रिपोर्ट के दूसरे संस्करण में चेतावनी दी गई है कि एआई से सशक्त धोखाधड़ी पारंपरिक तरीकों की तुलना में 4.5 गुना अधिक खतरनाक है, क्योंकि एजेंटिक कृत्रिम मेधा प्रणाली अब स्वायत्त रूप से पूरी धोखाधड़ी अभियान की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने में सक्षम हो गए हैं— जैसे जानकारी जुटाने से लेकर फिरौती की मांग तक— जिससे उनकी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
‘इंटरपोल वैश्विक आर्थिक धोखाधड़ी खतरा आकलन’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में “वैश्विक धोखाधड़ी संकट” की गंभीर तस्वीर पेश की गई है।
इसमें बताया गया है कि धोखाधड़ी अब एक “बहु-अपराधी माहौल” का रूप ले चुकी है, जहां मादक पदार्थों की तस्करी जैसे पारंपरिक अपराध अब इंटरनेट के माध्यम से संचालित अत्याधुनिक, तकनीक-समर्थित ठगी के साथ जुड़ रहे हैं।
इंटरपोल की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि “फ्रॉड-एज-ए-सर्विस” प्लेटफॉर्म और सृजनात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने इस क्षेत्र में प्रवेश की बाधाओं को लगभग खत्म कर दिया है, जिससे कम कौशल वाले लोग भी बेहद वास्तविक दिखने वाले धोखाधड़ी अभियानों को अंजाम दे पा रहे हैं।
भाषा रंजन सुरेश
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