ईडी ने गेम्सक्राफ्ट की 1906 करोड़ रुपये की और संपत्ति कुर्क की

ईडी ने गेम्सक्राफ्ट की 1906 करोड़ रुपये की और संपत्ति कुर्क की

ईडी ने गेम्सक्राफ्ट की 1906 करोड़ रुपये की और संपत्ति कुर्क की
Modified Date: July 24, 2026 / 03:45 pm IST
Published Date: July 24, 2026 3:45 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी ‘गेम्सक्राफ्ट’ की 1,906 करोड़ रुपये की और संपत्ति कुर्क की है। एजेंसी का आरोप है कि इस मंच ने खेल का ऐसा ‘लत लगाने वाला’ माहौल बनाया, जिसने खिलाड़ियों को ‘बार-बार दांव लगाने’ के लिए प्रोत्साहित किया।

अस्थायी रूप से कुर्क की गई इन संपत्तियों में बैंक सावधि जमा, म्यूचुअल फंड, इक्विटी शेयर, एक फार्महाउस और कई रिहायशी व वाणिज्यिक अचल संपत्तियां शामिल हैं।

ये संपत्तियां ‘गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड’ के शेयरधारकों, उनके परिवार के सदस्यों, निजी पारिवारिक न्यासों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर थीं।

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई 22 जुलाई को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई। यह मामला ‘रमीकल्चर’, ‘रमीप्राइम’, ‘प्लेशिप’ और ‘रमीटाइम’ ऐप से जुड़ा है।

ईडी ने कहा कि गेम्सक्राफ्ट और रमीटाइम टेक्नोलॉजीज इन ऐप के जरिए ऑनलाइन ‘रियल मनी गेम्स’ संचालित कर रही थीं और इनके पास मुख्य रूप से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में लगभग तीन करोड़ खिलाड़ियों का उपयोगकर्ता आधार था।

अगस्त 2025 में केंद्र सरकार ने देश में ऑनलाइन माध्यम से वास्तविक रूप से पैसे दांव पर लगाकर खेले जाने वाले खेल (मनी गेमिंग) पर रोक लगा दी थी।

सरकार का कहना था कि ये कंपनियां उपयोगकर्ता द्वारा जमा की गई दांव की रकम पर 10-15 प्रतिशत तक का ‘मंच कमीशन’ लेकर कमाई करती थीं।

एजेंसी ने यह भी बताया कि ये कंपनियां ‘बॉट्स’ (ऑटोमेटेड प्रोग्राम और एल्गोरिदम) का इस्तेमाल करती थीं, जो उन खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते थे, जिन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती थी।

सरकार ने कहा कि उपयोगकर्ताओं को लगातार खेल खेलने और अधिक पैसे जमा करने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से बोनस, रेफरल इंसेंटिव, टूर्नामेंट में मुफ्त प्रवेश और प्रचारात्मक प्रोत्साहन का प्रलोभन दिया जाता था।

इस मामले में हालिया कार्रवाई के बाद जब्त, कुर्क की गई संपत्ति का कुल मूल्य 2,401 करोड़ रुपये है।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में