अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर को पीएमएलए के तहत कुर्क कर सकती है ईडी
अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर को पीएमएलए के तहत कुर्क कर सकती है ईडी
नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय के परिसर को कुर्क कर सकता है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अल फलाह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय राजधानी में पिछले साल लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट के बाद केंद्रीय एजेंसियों की जांच के घेरे में है।
आधिकारिक सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए धनराशि कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय से हासिल की गई थी।
ईडी ने अल फलाह ट्रस्ट की ओर से संचालित शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी के सिलसिले में अल फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को पिछले साल नवंबर में धनशोधन के आरोपों में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने दावा किया था कि इन शिक्षण संस्थानों के पास शिक्षण के लिए आवश्यक वैध मान्यता नहीं थी।
सूत्रों के मुताबिक, मामले में चिह्नित “अपराध से अर्जित आय” (पीएमएलए के तहत अवैध धन) के एक हिस्से का इस्तेमाल फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की विभिन्न इमारतों के निर्माण में किए जाने का संदेह है।
सूत्रों ने बताया कि ईडी अल फलाह ट्रस्ट की विभिन्न चल और अचल संपत्तियों की पहचान एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया में जुटी है, जिसके पास अल फलाह विश्वविद्यालय सहित ट्रस्ट के सभी शैक्षणिक संस्थानों का मालिकाना हक है।
उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद अपराध की आय से अर्जित या निर्मित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने के लिए धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आदेश जारी किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, अल फलाह विश्वविद्यालय के छात्रों के अकादमिक हितों को ध्यान में रखते हुए परिसर की कुर्की के बाद भी उन्हें निर्बाध रूप से अध्ययन करने की अनुमति दी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि अपराध की आय से हासिल किसी संपत्ति को इसलिए कुर्क किया जाता है, ताकि उसे बेचने या नष्ट करने से रोका जा सके।
सूत्रों ने बताया कि अस्थायी कुर्की की कार्यवाही पूरी होने के बाद सरकार की ओर से नियुक्त रिसीवर को अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर का प्रशासन सौंपा जा सकता है, जिससे आपराधिक कार्रवाई और अभियोजन जारी रहने के बावजूद छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
ईडी ने नवंबर 2025 में अदालत से सिद्दीकी की रिमांड का अनुरोध करते हुए कहा था कि विश्वविद्यालय और उसके संचालक ट्रस्ट ने सिद्दीकी के निर्देश पर मान्यता प्राप्त होने का झूठे दावा किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र दाखिला लें और इस तरह उसने छात्रों तथा उनके अभिभावकों से “बेईमानी” से कम से कम 415.10 करोड़ रुपये की “अपराध की आय” अर्जित की।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी कम से कम पांच ऐसे मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें दिल्ली में कुछ भूखंड हासिल करने के लिए सिद्दीकी से जुड़े ट्रस्ट के कथित इशारे पर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी।
अल फलाह विश्वविद्यालय उस “सफेदपोश” आतंकवादी मॉड्यूल के खिलाफ जांच के दौरान सुर्खियों में आया है, जिसके सिलसिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन चिकित्सकों सहित कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
अल फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर उमर उन नबी ने पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी कार में विस्फोट कर दिया था, जिससे 15 लोगों की मौत हो गई थी।
ईडी ने दिल्ली पुलिस की दो प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए 14 नवंबर को सिद्दीकी और अल फलाह ग्रुप के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

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