बेल्जियम की संस्था से मिले चंदे की जांच के सिलसिले में जैसलमेर में ईडी की छापेमारी

बेल्जियम की संस्था से मिले चंदे की जांच के सिलसिले में जैसलमेर में ईडी की छापेमारी

बेल्जियम की संस्था से मिले चंदे की जांच के सिलसिले में जैसलमेर में ईडी की छापेमारी
Modified Date: September 21, 2026 / 10:07 pm IST
Published Date: September 21, 2026 10:07 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने राजस्थान के जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थानीय लोगों के बीच धर्म-परिवर्तन की गतिविधियां चलाने के लिए बेल्जियम की एक संस्था से मिले विदेशी चंदे के कथित दुरुपयोग के मामले में तलाशी ली।

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि इस कार्रवाई में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत दो परिसरों की तलाशी ली गई।

इसने कहा कि ईडी ने इस विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की कि जैसलमेर निवासी देउ राम, बेल्जियम की संस्थाओं से जैसलमेर में समाज के कमज़ोर वर्गों के बीच ‘‘धर्म-परिवर्तन की गतिविधियों’’ के लिए ‘‘गैर-कानूनी’’ तरीके से पैसे ले रहा है।

एजेंसी ने कहा कि राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण कराए बिना 5.10 करोड़ रुपये मिले, और इसके लिए मुख्य रूप से शैक्षिक सेवाओं, सांस्कृतिक एवं मनोरंजक गतिविधियों का हवाला दिया गया।

ईडी ने कहा, ‘‘इसमें अधिकांश पैसा ‘अमर एएसबीएल’ से मिला, जो बेल्जियम के ब्रसेल्स में स्थित एक गैर लाभकारी संगठन होने का दावा करता है।’’

अमर एएसबीएल की स्थापना 2011 में ब्रसेल्स में हुई थी और इसे बेल्जियम के दो नागरिक –जोस गोफिनेट तथा उसका बेटा सालियन गोफिनेट चलाते हैं।

ईडी ने कहा कि ये दोनों हर साल दो-तीन हफ़्ते के लिए जैसलमेर जाते हैं और स्थानीय बच्चों के माता-पिता तथा रिश्तेदारों से मिलते हैं, साथ ही ‘‘अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं एवं रीति-रिवाजों को बढ़ावा देने के लिए’’ बैठकें और धार्मिक सभाएँ आयोजित करते हैं।

एजेंसी का दावा है कि भले ही संगठन ने पिछले 14-15 साल से राम और चंद के ज़रिए खास तौर पर जैसलमेर में काम किया है, लेकिन इसने भारत में कोई ट्रस्ट या एनजीओ पंजीकृत नहीं कराया है।

इसने कहा कि देउ राम ने इस पैसे का इस्तेमाल ‘‘अपने निजी खर्चों के लिए और बेल्जियम की संस्था के प्रभाव में आकर, कमज़ोर वर्गों के बच्चों को शिक्षा देने की आड़ में उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने के लिए’’ किया।

ईडी ने कहा कि उसने कथित तौर पर अपने बैंक खाते से लगभग 2.60 करोड़ रुपये नकद निकाले और इस विदेशी चंदे की प्राप्ति तथा उपयोग के लिए कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया।

भाषा नेत्रपाल अविनाश

अविनाश


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