मराठा समुदाय और किसानों के मुद्दे पर सरकार और मनोज जरांगे की सोच एक जैसी : एकनाथ शिंदे

मराठा समुदाय और किसानों के मुद्दे पर सरकार और मनोज जरांगे की सोच एक जैसी : एकनाथ शिंदे

मराठा समुदाय और किसानों के मुद्दे पर सरकार और मनोज जरांगे की सोच एक जैसी : एकनाथ शिंदे
Modified Date: August 30, 2026 / 07:23 pm IST
Published Date: August 30, 2026 7:23 pm IST

छत्रपति संभाजीनगर, 30 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि राज्य की सरकार और अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे किसानों के समर्थन के मुद्दे पर एक ही सोच रखते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समुदाय के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शिंदे ने परभणी शहर में किसानों की एक रैली को संबोधित किया। रैली का जरांगे ने विरोध किया था और इस ‘राजनीतिक कार्यक्रम’ को रद्द करने की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस ने कुछ स्वयंसेवकों को हिरासत में लिया था।

जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपने अनिश्चितकालीन अनशन के दूसरे दिन जरांगे ने किसान कार्यक्रम को लेकर मराठा समुदाय से संबंध रखने वाले शिंदे, शिवसेना के बागी सांसद संजय जाधव और राज्य मंत्री संजय शिरसत पर निशाना साधा था।

शिंदे ने कहा, ‘रैली में किसान और मराठा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। हम किसानों से जुड़े मुद्दों में राजनीति नहीं लाना चाहते। यही सरकार और मनोज जरांगे की नीति भी है।’

उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए जरांगे से हुई अपनी मुलाकात और तत्कालीन सरकार की ओर से किए गए प्रयासों को याद किया।

शिंदे ने कहा, ‘मराठा समुदाय को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पिछली सरकार (2014-2019, देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली) ने शुरू की थी। हम किसी एक समुदाय के अधिकार छीनकर दूसरे समुदाय को नहीं देंगे।’

उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा-शिवसेना सरकार ने मराठाओं के लिए 12-13 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी थी।

पहले भी कई बार अनशन कर चुके जरांगे की मांग है कि पात्र मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी एक कृषि समुदाय है, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है।

शिंदे ने रैली में कहा, ‘यह रैली किसी को चुनौती देने के लिए नहीं है। आपको (मनोज जरांगे) समुदाय और किसानों का समर्थन है और सरकार भी दोनों के साथ है। दोनों एक ही सोच रखते हैं कि गरीबों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन किसी और के अधिकार छीनकर नहीं। मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए जितना संभव था, उतना किया और कानूनी पहलुओं पर गौर करने के बाद आगे भी ऐसा करता रहूंगा।’

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप


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