कृषि पर अल नीनो का असर सीमित रहने की उम्मीद : केंद्र

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कृषि पर अल नीनो का असर सीमित रहने की उम्मीद : केंद्र

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  • Publish Date - April 18, 2026 / 10:18 PM IST,
    Updated On - April 18, 2026 / 10:18 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि उसे इस वर्ष संभावित ‘अल नीनो’ मौसम चक्र से कृषि को होने वाले नुकसान के सीमित रहने की उम्मीद है। इसके लिए सरकार ने बेहतर सिंचाई बुनियादी ढांचे, जलाशयों के उच्च जल स्तर और पिछली ऐसी घटनाओं की तुलना में किसानों की बेहतर तैयारी का हवाला दिया।

यह आश्वासन तब आया, जब कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ की फसल के सीजन के लिए एक प्रारंभिक बैठक की अध्यक्षता की। भारत में खरीफ का सीजन जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होता है और देश के वार्षिक कृषि उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा इस अवधि में होता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है, जो दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत होगा। विभाग ने मानसून के दौरान अल नीनो के प्रभावी होने की आशंका भी जताई है। हालांकि, अंतिम पूर्वानुमान मई के अंत में जारी किया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, चौहान ने बैठक में कहा, ‘‘किसानों को किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।’’उन्होंने कहा कि सरकार ‘पूरी तैयारी’ के साथ आगे बढ़ रही है।

बयान के मुताबिक, मंत्री ने कहा, ‘‘अल नीनो के संभावित प्रभाव के बावजूद, कृषि क्षेत्र पर इसका प्रभाव पिछली बार की तुलना में अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है।’’

सरकार के इस आत्मविश्वास का एक अहम कारण जल भंडार की मौजूदा स्थिति है।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि देश भर के जलाशयों में इस समय के सामान्य स्तर का 127 प्रतिशत जल भंडार है, जो फसल के मौसम में सिंचाई की जरूरतों के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध कराता है।

उन्होंने कहा कि खरीफ और उसके बाद आने वाली रबी दोनों ऋतुओं के लिए बीज का भंडार आवश्यकता से अधिक सुरक्षित कर लिया गया है, और प्रतिकूल मौसम के कारण किसानों को दोबारा बुवाई करने या फसल बदलने के लिए मजबूर होने की स्थिति में आपातकालीन भंडार भी अलग से रखा गया है।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने वर्तमान परिस्थितियों की तुलना 2000 से 2016 के बीच के अल नीनो संकटों से की, जब फसलों का नुकसान अधिक गंभीर था, क्योंकि किसान बारिश पर अधिक निर्भर थे और जलवायु संबंधी दुष्प्रभावों से निपटने के लिए उनके पास कम साधन थे।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप