(तस्वीर सहित)
(सुमीर कौल)
श्रीनगर, पांच मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की शानदार जीत में निर्वाचन आयोग की “अहम भूमिका” रही। उन्होंने कहा कि हिंदू मतों का एकजुट होना और अल्पसंख्यक वोटों का विभाजन भी बंगाल में भाजपा की जीत का कारण बना।
उमर ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) को भारत के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी भूमिका परिभाषित करने और यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि क्या वह (‘इंडिया’) संसदीय चुनावों तक सीमित है या फिर राज्य के चुनावों में भी एकजुट होकर काम करेगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) प्रमुख ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास के दौरान अपनी निष्पक्षता के साथ समझौता किया। उन्होंने एसआईआर के दौरान बंगाल में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा करते हुए इसे राज्य में भाजपा की भारी जीत से जोड़ा।
उमर ने कहा कि भाजपा ने बंगाल और असम में तो शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन पार्टी के पास दक्षिणी राज्यों में दिखाने के लिए लगभग कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल और असम को देखिए। जी हां, असम में भाजपा ने अपनी सीटों की संख्या में सुधार किया है। इसके कई कारण हैं। मेरी तरह आप भी जानते हैं कि वे क्या हैं। पश्चिम बंगाल के नतीजों का हमें बहुत सावधानी से विश्लेषण करने की जरूरत है।”
उमर ने कहा, “पश्चिम बंगाल के नतीजों का सबसे आसान स्पष्टीकरण मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नामों को काटा जाना है।”
उन्होंने कहा, “मतदाताओं ने पाया कि उनके नाम हटा दिए गए हैं। वर्दी पहनकर देश की सीमाओं पर लड़ने और उसकी रक्षा करने वाले लोग, जिन्हें जीवन भर भारतीय नागरिक माना गया, अचानक उन पर सख्त नियम लागू कर दिए गए और उन्हें वोट देने से वंचित कर दिया गया। कुछ तो गड़बड़ है।”
उमर ने आरोप लगाया कि बंगाल के नतीजों में निर्वाचन आयोग की “अहम भूमिका” रही। उन्होंने कहा कि 60 फीसदी से अधिक हिंदू मतदाताओं का भाजपा के पक्ष में एकजुट होना और अल्पसंख्यक मतों में “व्यापक विभाजन”, खास तौर पर उन क्षेत्रों में जहां मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, भी नतीजों के लिए जिम्मेदार है।
नेकां प्रमुख ने कहा, “इसमें दो राय नहीं कि नतीजों में निर्वाचन आयोग की अहम भूमिका रही, लेकिन हमें अन्य कारकों पर भी विचार करना होगा।”
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के नतीजों की तुलना अन्य राज्यों के परिणामों से नहीं की जा सकती।
उमर ने कहा, “पश्चिम बंगाल में स्थिति अलग थी। वहां जिस तरह से एसआईआर किया गया, जिस तरह से मतदाता सूचियों में बदलाव किए गए, निर्वाचन आयोग ने जिस बारीकी से जांच की और यहां तक कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका…।”
उन्होंने कहा, “इस तरह की स्थितियां, कम से कम भारत के हालिया चुनाव इतिहास में, सिर्फ पश्चिम बंगाल में देखी गईं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह कहना सही होगा कि हम पश्चिम बंगाल से सबक लेकर उन्हें देश के अन्य हिस्सों में लागू कर सकते हैं।”
उमर ने हाल में कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल के नतीजे अप्रत्याशित होते हैं, तो निर्वाचन आयोग की भूमिका सवालों के घेरे में होगी।
हालांकि, मंगलवार के साक्षात्कार में नेकां प्रमुख ने कहा कि वह अब भी इस बात पर कायम हैं कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से ‘वोट चोरी’ नहीं होती है।
उन्होंने कहा, “हमने पश्चिम बंगाल में जो देखा… मुझे पता है कि बहुत से लोग मानते हैं कि ईवीएम में ही खामियां हैं। लेकिन मैं साजिश की ऐसी अवधारणा का समर्थन नहीं करता हूं।”
उमर ने जम्मू-कश्मीर और असम में परिसीमन की कवायद का जिक्र करते हुए कहा, “लेकिन मेरा मानना है कि निर्वाचन आयोग ने परिसीमन की प्रक्रिया और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया, दोनों को जिस तरह से अंजाम दिया, उससे उसने खुद को कोई फायदा नहीं पहुंचाया।”
उन्होंने कहा, “ये स्पष्ट उदाहरण हैं कि किस तरह दोनों प्रक्रिया एक दल को लाभ पहुंचाने के लिए या जम्मू-कश्मीर के मामले में एक दल और उसके सहयोगियों को लाभ पहुंचाने के लिए की गई थीं। और नतीजे खुद ही सब कुछ बयां करते हैं।”
उमर ने कहा, “आपने (निर्वाचन आयोग) जम्मू-कश्मीर में सात नयी सीट बनाईं और उनमें से छह सीट भाजपा ने जीत लीं। आपने विधानसभा क्षेत्रों का सीमांकन एक विशेष दल या उसके सहयोगियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया। और पश्चिम बंगाल के मामले में भी यही सच है।”
मुख्यमंत्री ने ‘इंडिया’ का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव नतीजे विपक्षी गठबंधन के लिए कोई नया संदेश नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “हमें यह तय करना होगा कि ‘इंडिया’ गठबंधन किस लिए है। क्या यह सिर्फ संसदीय चुनाव के लिए है या राज्यों के चुनावों के लिए भी?”
उमर ने कहा, “पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा। अब कांग्रेस ममता बनर्जी की बात से सहमत है कि 100 सीट धांधली से जीती गईं, लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा।”
मतभेदों के बावजूद उमर ने विपक्षी गठबंधन के भीतर कांग्रेस की “सर्वोच्च स्थिति” की पुष्टि की और किसी अन्य पार्टी के नेतृत्व संभालने के विचार को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, “भाजपा के अलावा कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसकी पूरे भारत में मौजूदगी है। हम सभी इस बात को स्वीकार करते हैं।”
उमर ने कहा, “यह कहना गलत होगा कि कोई और नेतृत्व संभाल सकता है। (मल्लिकार्जुन) खरगे साहब कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और इसी नाते वह ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठकों का नेतृत्व करते हैं। यही सही तरीका है।”
नेकां प्रमुख ने कहा कि कोई भी “न्यूनतम साझा कार्यक्रम” इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी गठबंधन राज्य विधानसभा चुनाव सामूहिक रूप से लड़ने का फैसला करता है या नहीं।
उन्होंने कहा कि वह अपने विशिष्ट विचार गठबंधन के साथ आंतरिक रूप से साझा करेंगे, न कि मीडिया के माध्यम से।
भाषा पारुल नरेश
नरेश