संसद में हर आवाज को सुने जाने का अवसर मिलना चाहिए : प्रधानमंत्री मोदी

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संसद में हर आवाज को सुने जाने का अवसर मिलना चाहिए : प्रधानमंत्री मोदी

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 03:28 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 03:28 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को संसद के मानसून सत्र को उत्पादक एवं सार्थक बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि सदन में चर्चा तर्क और तथ्यों के आधार पर होगी तो हंगामे या ऊंची आवाज में बोलने की कोई जरूरत नहीं होगी।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद भवन परिसर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि मौसमी मानसून का सकारात्मक प्रभाव दिखना शुरू हो गया है और संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब दोनों उत्पादक होते हैं तो वे देश और सभी जीवों के कल्याण में योगदान देते हैं। इसी उम्मीद के साथ हम प्रार्थना करते हैं कि मानसून सक्रिय रहे और संसद का मानसून सत्र भी उतना ही उत्पादक हो।’’

मॉनसून सत्र में विपक्ष नीट प्रश्नपत्र लीक, अयोध्या में राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी और ई-20 पेट्रोल जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है, ऐसे में सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है।

मोदी ने कहा कि सत्र शुरू होने के साथ ही देश ने गति पकड़ ली है और संसद की भावना इस गति में नई ऊर्जा भर सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है।

उन्होंने सदन में सार्थक चर्चा और देश को आगे ले जाने के लिए सामूहिक संकल्प लेने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी संसद में हर दल के कई अनुभवी सांसद हैं, जिनका ज्ञान और अनुभव संसद तथा देश के लिए जरूरी है। इसलिए संसद चलनी चाहिए, सार्थक चर्चा होनी चाहिए और देश को आगे ले जाने के लिए सामूहिक संकल्प लिए जाने चाहिए। यह समय की मांग और युवाओं की आकांक्षा है।’’

उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना से भरी आवाजों को संसद में उचित मंच मिले, ताकि युवाओं की आवाज उठाई जा सके और देश को दिशा दी जा सके।

मोदी ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जहां तथ्य होते हैं, वहां हंगामे की जरूरत नहीं होती। यदि आपके तर्क और तथ्य मजबूत हैं तो आवाज ऊंची करने की जरूरत नहीं है। मजबूत तर्क और तथ्य शांत लेकिन प्रभावी तरीके से आवाज को अपनी बात रखने में सक्षम बनाते हैं। हर आवाज को सुने जाने का अवसर मिलना चाहिए। यही संसद की भूमिका है। मैं सभी सांसदों से आग्रह करता हूं कि वे सदन की कार्यवाही में पूरे मनोयोग से भाग लें।’’

प्रधानमंत्री ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट बनाने वाले युवा नवप्रवर्तकों की सराहना करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष भी किया और कहा कि वह ‘‘56 साल के युवा’’ की बात नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले साल मानसून सत्र से ठीक पहले एक भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा था और दो दिन पहले एक भारतीय युवा स्टार्टअप ने असाधारण उपलब्धि हासिल की है।

मोदी ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक बड़ा संदेश है कि भारत के युवाओं की क्षमता और आकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह असीमित हैं और इससे बड़ी प्रेरणा देश के लिए कुछ नहीं हो सकती।

प्रधानमंत्री का इशारा स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा शनिवार को देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण की ओर था। कंपनी ने कई प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया, जिसके साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद निजी ऑर्बिटल प्रक्षेपण क्षमता रखने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया।

मोदी ने कहा कि दुनिया में ऐसे कुछ ही देश हैं जहां निजी कंपनियों ने इस तरह की क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा नवप्रवर्तकों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और यह वास्तव में उल्लेखनीय उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बताया गया है कि स्काईरूट स्टार्टअप में काम करने वाली टीम की औसत आयु केवल 28 वर्ष है। इन्हीं युवा दिमागों ने यह संभव बनाया है। मैं 56 साल के युवा व्यक्ति की बात नहीं कर रहा हूं। मैं एक ऐसे स्टार्टअप की बात कर रहा हूं जिसकी टीम की औसत आयु केवल 28 साल है और जिसने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का झंडा गाड़ दिया है।’’

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस साल 19 जून को 56 वर्ष के हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां देश में आत्मविश्वास पैदा करती हैं और दुनिया में भारत की एक सम्मानित एवं भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थिति को और मजबूत करती हैं।

उन्होंने कहा कि यह उस ‘‘सुधार एक्सप्रेस’’ का परिणाम है जिस पर देश सवार हुआ है और जिसने युवाओं को ऐसे साहसिक कदम उठाने तथा सफलता हासिल करने में सक्षम बनाया है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि ऊर्जा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ा संकट है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और रसायन जैसे क्षेत्रों में बाधाएं आईं, लेकिन इसके बावजूद भारत 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह भारत की ताकत और उत्साह एवं ऊर्जा के साथ नई ऊंचाइयां हासिल करने के संकल्प को दर्शाता है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल में राजस्थान में एक बड़ी तेल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई और कुछ सप्ताह पहले देश के तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन हुआ।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले हरित हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू की गई, और यह सुविधा दुनिया के बहुत कम देशों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा अपने नागरिकों को समर्पित यह हाइड्रोजन ट्रेन सबसे शक्तिशाली इंजन और सबसे लंबी दूरी तक बिना रुके चलने की क्षमता वाली ट्रेन है।

मोदी ने कहा, ‘‘यह भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और श्रमिकों के समर्पण का परिणाम है, जो राष्ट्र के लिए एक मिशन के साथ काम कर रहे हैं।’’

भाषा

मनीषा माधव

माधव