आबकारी ‘घोटाला’ : दिल्ली की अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया, के. कविता और 20 अन्य को बरी किया

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आबकारी ‘घोटाला’ : दिल्ली की अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया, के. कविता और 20 अन्य को बरी किया

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  • Publish Date - February 27, 2026 / 01:18 PM IST,
    Updated On - February 27, 2026 / 01:18 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए यहां की एक अदालत ने दोनों नेताओं और 21 अन्य को कथित शराब नीति घोटाला मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया और उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

इस मामले में बरी किए गए 21 अन्य आरोपियों में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं।

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने जांच में हुई चूक के लिए सीबीआई पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे, जबकि सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता था।

सीबीआई आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।

न्यायाधीश ने ‘‘कुछ भ्रामक कथनों’’ पर जोर दिया और कड़े शब्दों में कहा कि विस्तृत आरोपपत्र में कई कमियां हैं जिनकी पुष्टि सबूतों या गवाहों से नहीं होती है।

न्यायाधीश सिंह ने कहा, ‘‘…आरोपपत्र में आंतरिक विरोधाभास हैं, जो साजिश की थ्योरी की जड़ पर प्रहार करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि किसी भी सबूत के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते और पूर्व मुख्यमंत्री को बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया गया है।

न्यायाधीश ने कहा कि यह कानून के शासन के प्रतिकूल था।

सिसोदिया के संबंध में न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो उनकी संलिप्तता को दर्शाता हो और न ही उनसे कोई बरामदगी की गई है।

अदालत ने आबकारी नीति में किसी व्यापक साजिश या आपराधिक इरादे के अभाव पर जोर देते हुए कहा कि संघीय एजेंसी का मामला न्यायिक जांच में खरा नहीं उतरता, खासकर तब जब सीबीआई ने मात्र अनुमानों के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की।

उसने गवाहों के बयानों के आधार पर अपना मामला बनाने के लिए भी संघीय जांच एजेंसी की आलोचना की।

अदालत ने कहा, ‘‘अगर इस तरह के आचरण की अनुमति दी जाती है, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। किसी आरोपी को क्षमादान देकर उसे गवाह बनाना, उसके बयानों का इस्तेमाल जांच/विवरण में मौजूद कमियों को भरने और अन्य लोगों को आरोपी बनाने के लिए करना गलत है।’’

मामले में बरी किए गए अन्य आरोपियों में कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह ढल, अर्जुन पांडे, बुचीबाबू गोरंटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह रयात, अरविंद कुमार सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष माथुर और पी सरथ चद्र रेड्डी शामिल हैं।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा