आजादी की यात्रा में शेखावाटी के योगदान को दर्शाती है प्रदर्शनी ‘राज से स्वराज तक’

आजादी की यात्रा में शेखावाटी के योगदान को दर्शाती है प्रदर्शनी ‘राज से स्वराज तक’

आजादी की यात्रा में शेखावाटी के योगदान को दर्शाती है प्रदर्शनी ‘राज से स्वराज तक’
Modified Date: September 26, 2026 / 05:30 pm IST
Published Date: September 26, 2026 5:30 pm IST

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) शहर में एक नयी प्रदर्शनी ब्रिटिश राज, स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद के 80 वर्षों के दौरान राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को वहां के लोगों के चित्रों, बारीकी से भित्तिचित्रों से सजी इसकी हवेलियों की तस्वीरों और पांडुलिपियों, समाचारपत्रों तथा पत्रों जैसी दुर्लभ कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत करती है।

भारत पर्यावास केंद्र (आईएचसी) की ‘विजुअल आर्ट्स गैलरी’ में रामगढ़ के कला एवं विरासत संग्रहालय (एमओएचएआर) द्वारा प्रस्तुत ‘राज से स्वराज तक’ यह झलक पेश करता है कि बदलते समय का प्रतिबिंब क्षेत्र की कला, वास्तुकला, वस्तुओं, दस्तावेजों और रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह दिखाई देता था।

श्रुति नाडा पोद्दार और अलका पांडे द्वारा तैयार की गई यह प्रदर्शनी शेखावाटी की 10 अलग-अलग यात्राओं को दिखाती है। यह प्रदर्शनी एमओएचएआर संग्रहालय और पोद्दार के निजी संग्रह से ली गई चीजों पर आधारित है। इसमें कलाकृतियां, पांडुलिपियां, टेलीग्राम, अखबार, पत्र, नक्शे, ओलियोग्राफ (जिनमें राजा रवि वर्मा का संग्रह भी शामिल है), मैनचेस्टर टेक्सटाइल लेबल, पुराने संदेश, सिक्के, मुद्रा, खेल, आजादी से जुड़ी तस्वीरें और दूसरी ऐतिहासिक चीज़ें शामिल हैं।

पोद्दार ने एक बयान में कहा, “शेखावाटी हमेशा से अपने खूबसूरत भित्ति-चित्रों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इन हवेलियों से जुड़ी कहानियों में और भी बहुत कुछ है, जिसे जाना जा सकता है। ‘राज से स्वराज तक’ प्रदर्शनी एमओएचएआर संग्रह के अलग-अलग पहलुओं को एक साथ लाती है, ताकि इस इलाके को इसके अनोखे इतिहास, कला, चीज़ों और अभिलेख से जुड़ी सामग्री के जरिए समझा जा सके।”

प्रदर्शनी का समापन 30 सितंबर को होगा।

भाषा

प्रशांत दिलीप

दिलीप


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