‘पोस्ट-फैक्टो’ पर्यावरणीय मंजूरी के दायरे के विस्तार स्वीकार्य नहीं: कांग्रेस

‘पोस्ट-फैक्टो’ पर्यावरणीय मंजूरी के दायरे के विस्तार स्वीकार्य नहीं: कांग्रेस

‘पोस्ट-फैक्टो’ पर्यावरणीय मंजूरी के दायरे के विस्तार स्वीकार्य नहीं: कांग्रेस
Modified Date: July 30, 2026 / 02:09 pm IST
Published Date: July 30, 2026 2:09 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह किसी कार्य के पूरा होने के बाद पर्यावरणीय मंजूरी (पोस्ट-फैक्टो) देने के दायरे का विस्तार करने के हर प्रयास का विरोध करती रहेगी और पर्यावरण कानून के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के संदर्भ में यह टिप्पणी की।

न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र सरकार के 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन को रद्द कर दिया, जिसके तहत बिना पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के शुरू की गई परियोजनाओं को पूर्वप्रभावी पर्यावरणीय मंजूरी देने की व्यवस्था बनाई गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सर्वसम्मत फैसले में सरकार को कुछ राहत भी प्रदान की। पीठ ने कहा कि यह फैसला भविष्य के प्रभाव से लागू होगा और पहले से पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) प्राप्त परियोजनाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी।

कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मई 2025 में उच्चतम न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ ने पर्यावरण कानून के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

उन्होंने कहा, ‘‘पीठ ने माना था कि पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य है और 2017 की अधिसूचना तथा 2021 के कार्यालय ज्ञापन के जरिए बनाई गई बाद में मंजूरी देने की व्यवस्था गैरकानूनी कार्यों को बढ़ावा देती है, पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) प्रक्रिया को कमजोर करती है तथा सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।’’

रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए दलील दी कि इससे बिना पूर्व मंजूरी शुरू की गईं करोड़ों रुपये की परियोजनाएं प्रभावित होंगी।

उनका कहना है, ‘‘उच्चतम न्यायालय का कल सुनाया गया फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस फैसले में सरकार को ‘‘असाधारण परिस्थितियों’’ में बाद में पर्यावरणीय मंजूरी देने के लिए वैधानिक व्यवस्था बनाने की अनुमति भी दी गई है और इन परिस्थितियों को परिभाषित करने का अधिकार भी सरकार के पास होगा।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पिछले 17 वर्षों में मैंने चिंतित नागरिकों के एक बड़े वर्ग और भारत के पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रावधानों को कमजोर किए जाने के विरोध में चलाए गए अनेक जन अभियानों का समर्थन किया है।’’

रमेश ने कहा, ‘‘हम कार्य संपन्न होने के बाद पर्यावरणीय मंजूरी देने के दायरे का विस्तार करने के हर प्रयास का विरोध जारी रखेंगे।’’

भाषा हक

हक वैभव

वैभव


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