‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरे गाना अनिवार्य करने वाले कानून के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरे गाना अनिवार्य करने वाले कानून के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरे गाना अनिवार्य करने वाले कानून के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब तलब
Modified Date: September 22, 2026 / 12:07 pm IST
Published Date: September 22, 2026 12:07 pm IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कर्नाटक संगीत शैली के गायक टी. एम. कृष्णा की उस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा जिसमें ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरे गाना अनिवार्य करने वाले दंडात्मक कानून को चुनौती दी गई है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कृष्णा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर की दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि वह कानून के दंडात्मक पहलू की समीक्षा कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी नहीं किया। उसने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रगीत होने में कोई संदेह नहीं है लेकिन इसके उल्लंघन पर दंड के प्रावधान की संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों के संदर्भ में समीक्षा की जा सकती है।

संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देते हैं और व्यक्तिगत एवं सामूहिक धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के अंतिम चार अंतरों में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी-देवताओं के प्रति आस्था व्यक्त की गई है और इन अंशों को गाना अनिवार्य करना देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ के दायरे में ‘वंदे मातरम्’ को शामिल करने संबंधी संशोधन मनमाना है, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और ‘‘बहुसंख्यक समुदाय से जुड़े धार्मिक संदेश’’ को आगे बढ़ाता है।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा


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