जयपुर, 24 जून (भाषा) कांग्रेस की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बुधवार को राज्य मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधते हुए मांग की कि उनसे जुड़े लोगों के यहां हुई कार्रवाई में मिले धन और कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष एवं गहन जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मातृ मृत्यु के मामलों, विभिन्न अस्पतालों में कथित नकली दवाओं के उपयोग तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल में की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों के सिलसिले में भी सवाल उठाए।
डोटासरा ने यहां प्रेस वार्ता में कहा कि यदि मंत्री से जुड़े लोगों के पास से 2.43 करोड़ रुपये बरामद हुए हैं तो यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि यह राशि मंत्री द्वारा कराई गई छापेमारी के दौरान वसूली गई या फिर छापे नहीं डालने के एवज में ली गई।
उन्होंने कहा, “इतनी बड़ी रकम जब्त हुई है तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह धन छापों के नाम पर लिया गया था या छापे नहीं करने के लिए।”
डोटासरा ने कहा कि स्वयं मंत्री यह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें सूचना देने वाले लोग इस मामले में शामिल थे, ऐसे में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) या विशेष अभियान समूह (एसओजी) जैसी एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराना मंत्री की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, “यदि छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो समयबद्ध जांच के आदेश दिए जाने चाहिए। तभी ईमानदारी के दावों पर विश्वास किया जा सकता है।”
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम की बरामदगी के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि इससे संदेह पैदा होता है और पूरे मामले में पारदर्शिता आवश्यक है।
स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर डोटासरा ने कोटा, बीकानेर और जोधपुर में प्रसव के दौरान या बाद में महिलाओं के बीमार हो जाने, उनकी मौत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि अस्पतालों में नकली दवाओं और इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया जा रहा है तथा सरकार अब तक किसी भी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर सकी है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें महिलाओं की प्रसव पीड़ा सहन करने की क्षमता का उल्लेख किया गया था। डोटासरा ने कहा कि ‘सी-सेक्शन’ (ऑपरेशन से प्रसव) जैसे चिकित्सा संबंधी निर्णय डॉक्टर लेते हैं, मंत्री नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा कोटा और बीकानेर में विरोध प्रदर्शन किए जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।
डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी और इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वह नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ बीकानेर जाकर कार्रवाई की मांग करेंगे।
सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई पर उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उचित सत्यापन के पूजा स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन सभी कार्रवाइयां पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हिंदू हों या मुस्लिम, लोग नाराज हैं। यदि सीमा सुरक्षा के लिए कोई योजना है तो उसे सर्वदलीय बैठक में साझा किया जाना चाहिए और सार्वजनिक किया जाना चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो।
डोटासरा ने राजस्थान-हरियाणा जल समझौते को लेकर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि राज्य के हितों से समझौता किया जा रहा है।
उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रस्तावित पाइपलाइन, जो राजस्थान के लिए बनाई जा रही है, उससे हरियाणा भी पानी ले सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि ऐसी व्यवस्था को मंजूरी दी गई तो यह राजस्थान के हितों पर गंभीर आघात होगा।”
अपने पुत्र और अन्य परिजनों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) में चयन दिलाने के लिए फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र हासिल करने के आरोपों पर डोटासरा ने कहा कि सरकार को स्वयं संज्ञान लेकर पूरे मामले की जांच करानी चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इन सभी मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और सरकार से जवाबदेही की मांग करती रहेगी।
भाषा बाकोलिया राजकुमार
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