बेंगलुरु, 24 जून (भाषा) कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का इस्तेमाल ‘‘राजनीतिक मकसद’’ के लिए कर रही है।
प्रियंक ने कर्नाटक में अधिकारियों के यहां छापेमारी की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बातें कहीं।
उन्होंने दावा किया कि 12 वर्षों में हजारों बार तलाशी लेने के बावजूद, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मामलों में दोषसिद्धि की दर बहुत कम रही, यह एक ऐसा आंकड़ा है जिसने राजनीतिक मंशा के शक को और गहरा कर दिया।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले 12 वर्षों में पूरे भारत में हजारों बार तलाशी ली गई है। दोषी ठहराए जाने की दर दो प्रतिशत से भी कम है। इससे क्या पता चलता है? क्या आप अब भी कह सकते हैं कि ये कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित नहीं हैं?’’
प्रियंक ने आरोप लगाया कि आयकर विभाग, ईडी और सीबीआई केंद्र सरकार के ‘‘हथियार’’ बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा बार-बार यह कहना कि केंद्रीय एजेंसियां कांग्रेस नेताओं को निशाना बना सकती हैं, इस धारणा को और मजबूत करता है कि ऐसी जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
जब पूछा गया कि क्या उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है, तो मंत्री ने कहा कि यह ‘‘बिल्कुल संभव’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसा होना है, तो कभी न कभी तो होगा ही। क्या भाजपा नेताओं ने धमकियां नहीं दी हैं? भाजपा के मौजूदा सांसद और विधायक ऐसा कह रहे हैं, वे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं और हमें फोन करके भी ऐसा कह रहे हैं। इसमें नया क्या है?’’
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित बेंगलुरु दौरे के बारे में पूछे गए एक सवाल पर मंत्री ने कहा कि वह शायद दस्तावेज जमा करने के लिए शहर का दौरा करेंगे।
प्रियंक खरगे पिछले एक महीने से आरएसएस को निशाना बना रहे हैं और संगठन से उसके पंजीकरण और आर्थिक लेन-देन के बारे में जानकारी देने के लिए कह रहे हैं।
आरएसएस प्रमुख का जिक्र करते हुए प्रियंक ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता। कहा जा रहा है कि मोहन भागवत बेंगलुरु आ रहे हैं। मुझे नहीं पता कि वह अपने साथ संबंधित दस्तावेज ला रहे हैं या नहीं।’’
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह आरएसएस के खिलाफ कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं, तो मंत्री ने कहा कि वह बस अपने उठाए गए सवालों के जवाब मांग रहे हैं।
भाषा शफीक सुरेश
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