यमुना के किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने के अध्ययन के लिए आईआईटी-दिल्ली की मदद लेगी

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यमुना के किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने के अध्ययन के लिए आईआईटी-दिल्ली की मदद लेगी

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 04:49 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 04:49 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा है कि यमुना नदी के किनारे बाढ़ से बचाव के लिए लगभग चार किलोमीटर लंबी नयी सुरक्षा दीवार के निर्माण के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-दिल्ली से अध्ययन कराया जाएगा।

अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि विस्तृत अध्ययन के बाद अगले वर्ष यमुना किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवार के निर्माण कार्य शुरू किए जाएंगे, जिससे बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मंत्री ने कहा, ‘‘फिलहाल यमुना नदी के किनारे मौजूदा दीवार की मरम्मत की जाएगी ताकि यमुना बाजार सहित संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा की जा सके। नयी परियोजना का कार्य अगले वर्ष आईआईटी दिल्ली के विस्तृत अध्ययन के बाद शुरू किया जाएगा।’’

कश्मीरी गेट के पास स्थित यमुना बाजार क्षेत्र को शहर के सबसे अधिक जलजमाव वाले क्षेत्रों में से एक माना गया है।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में सुरक्षा दीवार होने के बावजूद इस क्षेत्र में जलस्तर 8 से 10 फुट तक पहुंच गया था, जिसके कारण लोगों को निकालने का अभियान चलाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र मानसून में यमुना के उफान पर होने से सबसे पहले प्रभावित होने वाले इलाकों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि 1978 की भीषण बाढ़ से लेकर 2023 और 2025 तक की घटनाओं में यह इलाका लगातार बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहा है।

योजना के अनुसार, मजनू का टीला से लेकर पुराने रेलवे पुल तक 4.72 किलोमीटर लंबी दीवार बनाने का प्रस्ताव है, जिसे अगले मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बजट में औपचारिक रूप से स्वीकृत यह निर्णय शहर में बार-बार आने वाली गंभीर बाढ़ की स्थिति के अनुभवों पर आधारित है।

यह दीवार सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करेगी, जो जलस्तर बढ़ने पर सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

अगस्त 2024 में संयुक्त बाढ़ समिति (जेएफसी) की रिपोर्ट में भी इस हिस्से पर बाढ़ सुरक्षा दीवार को दीर्घकालिक समाधान के रूप में सबसे उपयुक्त बताया गया था।

भाषा अमित प्रशांत

प्रशांत