सड़क दुर्घटना में मृतक पुलिस कांस्टेबल के परिवार को मिलेगा एक करोड़ रु का मुआवजा

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सड़क दुर्घटना में मृतक पुलिस कांस्टेबल के परिवार को मिलेगा एक करोड़ रु का मुआवजा

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 05:08 PM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 05:08 PM IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) दिल्ली के एक न्यायाधिकरण ने पिछले साल अलीगढ़ में एक सड़क दुर्घटना में मारे गए उत्तर प्रदेश के पुलिस कांस्टेबल के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी को मुआवजे की पूरी राशि का भुगतान करने का उत्तरदायी ठहराते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय संबंधित वाहन का वैध बीमा था। साथ ही, बीमा कंपनी अपने बचाव में कोई भी कानूनी आधार साबित करने में विफल रही।

दिल्ली स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की पीठासीन अधिकारी पूजा अग्रवाल ने दुर्घटना में जान गवांने वाले दिनेश कुमार के परिवार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

जानकारी के अनुसार, 13 जनवरी 2024 की सुबह कुमार जब मोटरसाइकिल से काम से घर लौट रहे थे तभी मथुरा बाईपास फ्लाईओवर पर एक तेज रफ्तार कार ने उनके वाहन को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे वह सड़क पर गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद उन्हें तुरंत अलीगढ़ के जे एन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

न्यायाधिकरण ने 19 जनवरी को दिए अपने फैसले में चश्मदीद गवाह और पुलिस की चार्जशीट को आधार मानते हुए कहा, ‘याचिकाकर्ताओं ने यह साबित कर दिया है कि 13 जनवरी को हुई दुर्घटना प्रतिवादी की गाड़ी से ही हुई थी। इस आधार पर यह माना जाता है कि मृतक दिनेश कुमार को उसी हादसे में घातक चोटें आईं ।’

बीमा कंपनी ने दलील दी कि जिस गाड़ी पर आरोप लगा है उसे जानबूझकर फंसाया गया है। कंपनी का कहना था कि शुरुआत में दर्ज हुई प्राथमिकी में वाहन संख्या नहीं थी। साथ ही, अदालत में केवल एक ही चश्मदीद गवाह से पूछताछ की गई थी जिसका बयान काफी समय बाद दर्ज किया गया था।

न्यायाधिकरण ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा, ‘शुरुआत में प्राथमिकी किसी अज्ञात वाहन के खिलाफ दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि दोषी वाहन इसमें शामिल नहीं था। प्राथमिकी से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि उसमें घटना संबंधित सभी तथ्य शामिल हों।’

उन्होंने कहा, ‘अगर जांच के दौरान शामिल वाहन की पहचान और अन्य सबूत सामने आते हैं तो उन्हें केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उनका उल्लेख प्राथमिकी में नहीं हुआ है।’

न्यायाधिकरण ने स्पष्ट करते हुए कहा, ‘ऐसा कोई भी संकेत नहीं मिला है कि यह दुर्घटना मृतक की किसी गलती या लापरवाही की वजह से हुई थी। रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत भी मौजूद नहीं है।’

न्यायाधिकरण ने मुआवजे का निर्धारण करते हुए कहा कि दिनेश कुमार की उम्र मात्र 37 वर्ष थी और वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।

दुर्घटना के समय वह उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, न्यायाधिकरण ने कुल एक करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसमें परिवार के आर्थिक नुकसान के लिए 97.38 लाख रुपये शामिल हैं।

भाषा

प्रचेता नरेश

नरेश