‘इंसाफ मिलने का एहसास’ पर लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है : अंकित शर्मा का परिवार
‘इंसाफ मिलने का एहसास’ पर लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है : अंकित शर्मा का परिवार
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) आसूचना ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा के परिवार ने शुक्रवार को कहा कि दोषी ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा के फैसले से उन्हें राहत तो मिली, लेकिन खोया हुआ भाई कभी वापस नहीं मिल सकेगा।
2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद हुसैन और चार अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि दोषियों के सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
अंकित के भाई अंकुर शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “लगभग छह साल तक इस मामले में लड़ने के बाद, हमारे परिवार को आखिरकार ऐसा महसूस हो रहा है कि हमें न्याय मिला है।”
इसे “बहुत लंबा और दर्दनाक सफर” बताते हुए अंकुर ने कहा कि कई बार ऐसा लगा कि कानूनी प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होगी, लेकिन परिवार को न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहा। उन्होंने कहा कि शुक्रवार के फैसले से उन्हें “कुछ राहत” मिली है और यह एहसास हुआ है कि उनका सालों का इंतज़ार और संघर्ष बेकार नहीं गए।
उन्होंने आगे कहा कि परिवार पिछले छह सालों से हर दिन इस दुख के साथ जी रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी उनके भाई का मामला टीवी बहस, अखबारों या बातचीत में भी सामने आता था, तो वे जख्म फिर से ताजा हो जाते थे जो असल में कभी भरे ही नहीं थे।
हर बातचीत उन्हें याद दिलाती थी कि अंकित अब उनके बीच नहीं रहा। उन्होंने कहा, “हम सभी के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत मुश्किल था, लेकिन हमें उम्मीद थी कि एक दिन न्याय जरूर होगा।”
इस फ़ैसले को “मिले-जुले अहसास” वाला पल बताते हुए अंकुर ने कहा कि फैसले में अपराध की गंभीरता को तो माना गया है, लेकिन इससे परिवार के नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “राहत तो है क्योंकि अदालत ने एक कड़ा फैसला सुनाया है। लेकिन एक खालीपन भी है जिसे कोई भी फैसला कभी नहीं भर सकता।”
उन्होंने कहा कि पारिवारिक मौकों पर यह दर्द और भी ज्यादा महसूस होता है। अंकुर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मेरे भाई का जन्म दो फरवरी 1994 को हुआ था। इस साल वह 32 साल का हो जाता।”
फैसले का स्वागत करते हुए अंकुर ने कहा कि परिवार की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।” ऊपरी अदालतों से अपील पर उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद है कि इस मामले को ‘सबसे दुर्लभ मामलों’ में से एक माना जाएगा और दोषी पाए गए हर व्यक्ति को वैसी ही सजा मिलेगी। उन्होंने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, “तभी हमें लगेगा कि मेरे भाई और हमारे परिवार को पूरा न्याय मिला है।”
इस बीच, हुसैन ने कहा कि वह फैसले को चुनौती देगा। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत कक्ष से बाहर ले जाए जाते समय उसने कहा, “इंसाफ हाई कोर्ट से मिलेगा।”
भाषा
प्रशांत नरेश
नरेश

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