फिल्मी हस्तियों ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की
फिल्मी हस्तियों ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) अभिनेता-गायक दिलजीत दोसांझ, फिल्मकार अनुराग कश्यप, अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, हुमा कुरैशी सहित फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने ‘नीट’ परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों छात्रों ने सोमवार को संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें आंसू गैस के गोले छोड़कर और लाठीचार्ज कर आगे बढ़ने से रोक दिया।
पिछले महीने के अंत से इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोकने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्र घायल हो गए।
अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता प्रकाश राज जहां छात्रों के मार्च में शामिल हुए, वहीं कई अन्य कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिये प्रदर्शन का समर्थन किया और चिंता व्यक्त की।
अमेरिका में मौजूद अभिनेता-गायक दिलजीत दोसांझ ने कहा कि छात्रों के साथ जो व्यवहार किया गया, वह ‘‘बेहद गलत’’ था।
दोसांझ ने ‘इंस्टाग्राम’ पर लिखा, ‘‘छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि वे छात्रों की मांगें सुनें। मुझे पहले भी कई बार ‘राष्ट्रविरोधी’ कहा जा चुका है और मुझे पता है कि अब भी ऐसा कहा जाएगा। किसानों के आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनपर मैं आज भी खुलकर बात नहीं कर सकता।’’
अभिनेता और हास्य कलाकार वीर दास ने कहा कि युवाओं के समर्थन में आवाज उठाना जरूरी है।
दास ने कहा कि यदि कोई कलाकार जनता के मुद्दों पर चुप रहता है और बाद में उन्हीं लोगों से अपने कार्यक्रमों के टिकट खरीदने की उम्मीद करता है, तो यह दोहरा मापदंड है। उन्होंने कहा कि भारत में संगीत कार्यक्रमों और लाइव प्रस्तुतियों की संस्कृति युवाओं के समर्थन पर ही आधारित है।
वीर दास ने कहा, ‘‘यह मुद्दा अब केवल राजनीति का नहीं रह गया है। कलाकारों को उन विषयों पर बोलना चाहिए, जिनकी युवाओं को चिंता है।’’
अभिनेता रितेश देशमुख और उनकी पत्नी जेनेलिया देशमुख ने संयुक्त बयान में कहा कि देश के युवाओं की आवाज ‘‘बुलंद, स्पष्ट और निर्भय’’ तरीके से सुनी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘युवा हमारे लोकतंत्र की धड़कन हैं और देश के भविष्य के वास्तविक निर्माता हैं। हमें उनकी बात सुननी चाहिए, उनका समर्थन करना चाहिए और उन्हें सशक्त बनाना चाहिए।’’
अभिनेता सोनू सूद ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियां नहीं बरसाई जानी चाहिए थीं, बल्कि उन्हें गले लगाया जाना चाहिए था।
अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि वह प्रदर्शन के दौरान कही गई हर बात से सहमत नहीं हैं, लेकिन छात्रों के खिलाफ हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।
पेडनेकर ने कहा, ‘‘हमारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा प्रणाली की विफलताएं, अवसरों में असमानता, शिक्षकों की कमी और छात्रों पर अत्यधिक दबाव जैसी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। जिन छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, उन्हें जवाब मिलना चाहिए। सार्थक संवाद ही सुधार की शुरुआत है।’’
अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने कहा कि 20 जुलाई को कई हड्डियां टूटीं और उसके साथ देश का दिल भी टूट गया।
फिल्मकार अनुराग कश्यप ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग की आलोचना की।
कश्यप ने कहा, ‘‘क्या वर्दी पहनने के लिए अपनी आत्मा और अंतरात्मा से समझौता करना जरूरी है? क्या इस देश में कोई पुलिसकर्मी यह कह सकता है कि वह गलत आदेश का पालन नहीं करेगा?’’
अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने कहा कि प्रदर्शन स्थल के दृश्य देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ।
कुरैशी ने ‘इंस्टाग्राम’ पर लिखा, ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ इस तरह का बल प्रयोग और लाठीचार्ज बेहद दुखद है। इस स्थिति को अधिक धैर्य, संवाद और सुनने की भावना के साथ संभाला जा सकता था। हमने इस सरकार को चुना है और इसलिए सवाल पूछना तथा जवाबदेही की अपेक्षा करना हमारा अधिकार है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम विविधताओं वाला विशाल देश हैं। हर मुद्दे पर सहमत होना जरूरी नहीं है, लेकिन इतना तो माना ही जा सकता है कि किसी भी नागरिक की बात गरिमा के साथ सुनी जानी चाहिए, उससे पहले कि बल प्रयोग किया जाए।’’
उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले सभी छात्रों और नागरिकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
अभिनेत्री सोहा अली खान ने छात्रों के साहस की सराहना करते हुए कहा, ‘‘भविष्य युवाओं का है। उन्हें हमेशा सवाल पूछने, अपनी बात रखने और शांतिपूर्वक विरोध करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।’’
अभिनेत्री अदिति राव हैदरी ने कहा कि सभी छात्रों के लिए ‘‘सम्मान, गरिमा और संवेदनशीलता पर आधारित सुरक्षित वातावरण’’ सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की बात सुनना सार्थक प्रगति की बुनियाद है।
अभिनेता सिद्धार्थ ने अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों के प्रति समर्थन और सम्मान व्यक्त किया।
अभिनेत्री पूजा भट्ट ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता ‘‘कभी दुर्घटनावश नहीं होती, बल्कि यह सत्ता द्वारा सच को दबाने का तरीका है।’’
भट्ट ने कहा, ‘‘जब पुलिस या कानून लागू करने वाली एजेंसियां छात्रों के खिलाफ आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल करती हैं, तो अंततः राज्य स्वयं की रक्षा कर रहा होता है। इसके बाद इस हिंसा को ‘कानून और व्यवस्था’ जैसे शब्दों के पीछे उचित ठहराने की कोशिश की जाती है, क्योंकि असहमति को दबाना सत्ता की रक्षा करता है।’’
उधर, सोमवार की झड़पों के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, झड़पों में 118 से अधिक पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि पुलिस के 20 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश

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