नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी में जुटा है और इस बीच उत्तर प्रदेश और गोवा ने मतदान में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और पेपर ट्रेल यूनिट की ‘प्रथम स्तरीय जांच’ शुरू कर दी है।
प्रथम स्तरीय जांच के दौरान ईवीएम और वीवीपैट मशीन में किसी तरह की तकनीकी खराबी की जांच की जाती है। यह काम इन मशीन का निर्माण करने वाली दो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के इंजीनियर करते हैं।
खराब पाई जाने वाली मशीन को मरम्मत या बदलने के लिए संबंधित कंपनियों को वापस भेज दिया जाता है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ‘परीक्षण मतदान’ भी कराया जाता है, ताकि दोनों मशीन की कार्यक्षमता की जांच की जा सके।
एफएलसी चुनाव की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। निर्वाचन आयोग एक कार्यक्रम जारी करता है, जिसका राज्यों को पालन करना होता है और ये जांच उसी कार्यक्रम का हिस्सा होती हैं।
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है। वहीं, 60 सदस्यीय मणिपुर, 40 सदस्यीय गोवा, 117 सदस्यीय पंजाब और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा के कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होंगे।
जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के प्रावधानों के तहत निर्वाचन आयोग विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से ‘‘छह महीने पहले भी चुनाव करा सकता है।’’
एफएलसी के दौरान पिछली बार के चुनाव से संबंधित नियंत्रण इकाई और बैलट यूनिट में मौजूद किसी भी आंकड़े को पूरी तरह मिटा दिया जाता है। सभी जांच में सही पाए जाने के बाद मशीन को ‘एफएलसी ओके’ का दर्जा दिया जाता है और उस पर विशेष गुलाबी कागज की सील लगाकर बंद कर दिया जाता है, ताकि चुनाव की अगली तैयारियों तक कोई अनधिकृत व्यक्ति उसमें छेड़छाड़ ना कर सके।
एक ईवीएम में कम से कम एक बैलट यूनिट, एक नियंत्रण इकाई और एक वीवीपैट मशीन होती है।
भाषा अमित पवनेश
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