नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से उन याचिकाओं पर जवाब मांगा, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में दर्ज मतों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर’ का इस्तेमाल शुरू करने की मांग की गई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भारत सरकार से कहा कि वह ‘टोटलाइजर’ लागू करने में आ रही बाधाओं के बारे में जानकारी दे।
‘टोटलाइजर’ एक ऐसा उपकरण है जिससे लगभग 14 मतदेय स्थलों पर डाले गए मतों की गिनती एक साथ की जा सकती है।
पीठ ने कहा, ‘‘भारत सरकार, ईवीएम में दर्ज मतों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर’ लाने के मकसद से ‘चुनाव संचालन नियमों’ में जरूरी बदलाव करने के मामले पर विचार कर सकती है।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘हम यह जानना चाहेंगे कि अगर कोई रुकावट हैं तो वह क्या है, और क्या ऐसी व्यवस्था लागू करने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’’
पीठ ने केंद्र सरकार को चुनाव नियमों और विधि आयोग की सिफारिशों (जिनमें ‘टोटलाइजेशन’ का प्रस्तावित प्रावधान भी शामिल है) की समीक्षा करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं में से एक, वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि वह मतदाताओं की निजता सुनिश्चित करने के लिए ‘टोटलाइजर’ लागू करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा कहना है कि कई देश निजता के अधिकार को सुरक्षित रखने और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा से बचने के लिए ही इस टोटलाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने 2007 से लेकर कुछ दिन पहले तक – यहां तक कि कल दाखिल किए गए जवाब से पहले भी – हमेशा टोटलाइजर का समर्थन किया है।’’
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि टोटलाइजर लागू करने में कई रुकावटें हैं और ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियां इसके लिए सहमत नहीं हैं।
न्यायालय वकील अश्विनी उपाध्याय, योगेश गुप्ता और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें संसद, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के साझा मतदाता सूची बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था ताकि सार्वजनिक धन बचाया जा सके।
याचिका में अधिकारियों से मतगणना के लिए टोटलाइजर का इस्तेमाल करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
भाषा सुभाष नरेश
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