एनबीएफसी के साथ 12.84 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पांच लोग गिरफ्तार
एनबीएफसी के साथ 12.84 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पांच लोग गिरफ्तार
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी के कॉर्पोरेट बैंक खाते से डिजिटल माध्यम से 12.84 करोड़ रुपये निकालने में कथित तौर पर शामिल एक साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने 317 बार में यह रकम डिजिटली स्थानांतरित की और इनमें एक बैंक का ‘रिलेशनशिप मैनेजर’ भी शामिल है।
विशेष प्रकोष्ठ की आईएफएसओ इकाई में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव त्यागी ने एक बयान में बताया कि इकाई के त्वरित तकनीकी हस्तक्षेप से ठगी की रकम हासिल करने में इस्तेमाल खातों में मौजूद 1.7 करोड़ रुपये की राशि को सफलतापूर्वक फ्रीज करा दिया गया, ताकि ठगी गई रकम को सुरक्षित रखा जा सके।
पुलिस ने कहा कि जांच में ऑनलाइन ‘मैसेजिंग ऐप’ पर सक्रिय चीनी समूहों के साथ गिरोह के कथित संबंधों का भी पता चला।
पुलिस ने कहा कि ठगे गए पैसे का एक हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी के प्रकार‘यूएसडीटी’ में बदला गया और विदेश स्थित ठगों को हस्तांतरित कर दिया गया।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दुबई और भारत में स्थित गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
यह मामला 21 अगस्त को एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी को बैंक द्वारा भेजे गए संदेश के माध्यम से अपने कॉर्पोरेट खाते से अनधिकृत तौर पर पैसे निकालने का पता लगा।
शिकायत के अनुसार, कंपनी प्रबंधन से बिना किसी प्राधिकरण, निर्देश या सहमति के 34 बैंक खातों में 317 बार में लगभग 12.84 करोड़ रुपये भेजे गए।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बुलंदशहर के अभय कुमार सोलंकी, कुरूक्षेत्र के लवली (26), जयपुर के नमन कुमार और विकास (30) और बीकानेर निवासी हरमन (24) के रूप में हुई है।
पुलिस ने कहा कि सोलंकी के खाते में 60,000 रुपये जमा किए गए जिन्हें बाद में एटीएम के जरिए निकाल लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, लवली कुरुक्षेत्र के थानेसर में स्थित ‘प्रॉपर्टी गैलरी’ नाम के बैंक खाते का खाताधारक है। इस खाते में कथित तौर पर 80 लाख रुपये आए थे। पुलिस ने बताया कि लवली ने कैथल निवासी सत्यम के बहकावे में आकर यह खाता खुलवाया था। सत्यम फिलहाल फरार है।
नमन जयपुर में ‘इन्फर्मिटी सर्विसेज’ नाम से खुले एक बैंक खाते का धारक है, जिसमें 40 लाख रुपये आए थे। पुलिस ने कहा कि उसके एक अन्य बैंक खाते में भी लगभग 70 लाख रुपये आए और यह खाता देश भर में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 43 शिकायतों से जुड़ा है।
पुलिस के मुताबिक, विकास के जरिए नमन, हरमन के संपर्क में आया। हरमन ने नमन के मोबाइल में एक एपीके फाइल डाउललोड कर उसका फोन हैक किया और फिर ठगी पैसे प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए नमन के बैंक खाते का इस्तेमाल किया।
पुलिस ने बताया कि नमन को दिल्ली के एक सहयोगी सौरव से भी मिलवाया गया और वह राजधानी आया, जहां वह कृष्णा नगर के एक होटल में रुका। पुलिस ने बताया कि वहां भी उसके बैंक खाते का इसी तरह के तरीके से कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस ने कहा कि हरमन कथित तौर पर टेलीग्राम पर कई चीनी समूहों के संपर्क में रहा और उदयपुर के देवेंदर सिंह चौहान के भी संपर्क में था, जिसने कथित तौर पर ठगी के पैसे को यूएसडीटी में बदला और इसे विदेश स्थित ठगों को हस्तांतरित कर दिया।
पुलिस ने आरोप लगाया कि हरमन ने कमीशन के बदले नमन का बैंक खाता प्राप्त किया और संचालित किया और चौहान से लगभग 1.5 लाख रुपये प्राप्त किए।
पुलिस ने कहा कि जयपुर के एक बैंक में ‘रिलेशनशिप मैनेजर’ विकास ने कथित तौर पर नमन को विभिन्न बैंकों में खाते खोलने में मदद की और उसे हरमन से मिलवाया।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, चेक बुक और प्रॉपर्टी गैलरी की रबर स्टांप जब्त की गई हैं।
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव

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