दिल्ली में खुद को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट कार्ड धारकों को ठगने के आरोप में चार गिरफ्तार

दिल्ली में खुद को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट कार्ड धारकों को ठगने के आरोप में चार गिरफ्तार

दिल्ली में खुद को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट कार्ड धारकों को ठगने के आरोप में चार गिरफ्तार
Modified Date: September 24, 2026 / 06:58 pm IST
Published Date: September 24, 2026 6:58 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उत्तर दिल्ली पुलिस ने बैंक ग्राहक सेवा कर्मी बनकर क्रेडिट कार्ड के वार्षिक रखरखाव शुल्क के नाम पर एक व्यक्ति से 1.19 लाख रुपये ठगने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर बैंक के ग्राहक सेवा से संबंधी नंबरों से मिलते-जुलते ‘वर्चुअल’ फोन नंबरों और भुगतान ‘ऐप’ का इस्तेमाल किया।

उनके मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पहचान प्रिंस कुमार, विशाल तोमर, विशाल राघव और संजय वर्मा के रूप में हुई है।

पुलिस ने बताया कि पीड़ित को 16 जुलाई को खुद को बैंक क्रेडिट कार्ड अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने उसे बताया कि उसके कार्ड पर 2,499 रुपये का वार्षिक रखरखाव शुल्क लगाया गया है।

पुलिस ने बताया कि जब पीड़ित ने इस कथित शुल्क को रद्द करने का अनुरोध किया, तो उससे कहा गया कि उसे बैंक के ग्राहक सेवा विभाग से फोन आएगा।

उत्तर दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निहारिका भट्ट ने एक बयान में कहा कि इसके बाद उसे ‘+ 1850’ से शुरू होने वाले नंबर से एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को बैंक का ग्राहक सेवा का प्रतिनिधि बताया और पीड़ित को शुल्क को रद्द करने और नया क्रेडिट कार्ड जारी करने के बहाने एक ‘ऐप’ डाउनलोड करने के लिए राजी किया।

उन्होंने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर उससे तीन बार में कुल 1,19,837 रुपये ले लिए।

अधिकारी ने बताया कि उसका विश्वास जीतने के लिए, आरोपियों ने ‘फर्जी सेवा अनुरोध’ नंबर प्रदान किया और उसे आश्वासन दिया कि नया कार्ड चार घंटे के भीतर सक्रिय हो जाएगा और दो दिनों के भीतर उसे भेज दिया जाएगा।

पुलिस ने कहा कि जब कार्ड नहीं आया, तो पीड़ित ने अगले दिन वास्तविक बैंक ग्राहक सेवा से संपर्क किया जहां उसे बताया गया कि ऐसा कोई सेवा अनुरोध या नए कार्ड का अनुरोध मौजूद नहीं है। इसके बाद उसने अपना कार्ड ब्लॉक कर दिया और पुलिस से संपर्क किया।

इस बाबत ई-प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, ग्राहक आवेदन पत्र, मोबाइल नंबर, खाता डेटा, यूपीआई लेनदेन और लाभार्थी बैंक खातों का विश्लेषण किया।

पुलिस ने बताया कि वित्तीय जांच के दौरान जांचकर्ता उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी प्रिंस कुमार (20) से जुड़े एक बैंक खाते तक पहुंचे।

डीसीपी ने बताया कि खाते में पांच से सात दिनों के भीतर 12 लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन दिखाई दिया, जिसमें शिकायतकर्ता से कथित तौर पर ठगे गए पैसे भी शामिल थे।

उन्होंने बताया कि प्रिंस को 15 सितंबर को अलीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया और पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि उसने अपने सहयोगी विशाल तोमर के साथ बैंक खाता खोला था और पैसों के बदले खाता किट विशाल राघव को सौंप दी थी।

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद तोमर (21) को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया और उसने बताया कि खुलासा किया कि उसने राघव को बैंक खाते मुहैया कराए थे। पुलिस ने बताया कि इसके बाद राघव (27) को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके बाद जांचकर्ताओं ने दिल्ली के उत्तम नगर से संजय वर्मा (40) को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, वर्मा ने इससे पहले 2024-25 में नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम किया था, जहां उसने बैंक ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर लोगों के साथ ठगी करने का तरीका सीखा था।

पुलिस ने बताया कि वर्मा ने बाद में नोएडा में एक कॉल सेंटर शुरू किया, लेकिन पास के एक कॉल सेंटर पर पुलिस कार्रवाई के बाद अपना अवैध काम बंद कर दिया।

पुलिस के मुताबिक, वर्मा ने बॉबी और अवतार के साथ धोखाधड़ी का गिरोह फिर से शुरू करने की साजिश रची।

जांच के अनुसार, राघव ने कथित तौर पर बैंक खातों की व्यवस्था की, जबकि फर्जी सिम कार्ड बॉबी और अवतार के माध्यम से प्राप्त किए गए थे।

पुलिस ने बताया कि ठगी से प्राप्त धन को एटीएम और अन्य माध्यमों से निकाला गया, जिसके लिए राघव को 30 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए उपकरणों से जुड़ी 32 और शिकायतें मिली हैं।

भाषा नोमान

नोमान नरेश

नरेश


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