(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 31 मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर दौरे के दौरान हमला करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ये गिरफ्तारियां इलाके से जुटाए गए वीडियो फुटेज के आधार पर रात भर की छापेमारी के दौरान की गईं।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर कस्बे में शनिवार को डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी पर कई लोगों ने पत्थर, अंडे फेंके और अपशब्द कहे, जो क्रिकेट हेलमेट पहनकर और अपने सहयोगियों की मदद से भीड़ से बच निकले।
चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने गए बनर्जी पर हमला हुआ था। बाद में उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता उन्हें जान से मारने की कोशिश कर रहे थे। अज्ञात लोगों ने नेता के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और ‘‘चोर, चोर’’ के नारे लगाते हुए उनके साथ मारपीट की।
देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए और भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने बनर्जी पर कथित तौर पर लात-घूंसे बरसाकर उन पर शारीरिक हमला करने की कोशिश की जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया।
एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामला दर्ज कर लिया है क्योंकि रविवार तक न तो बनर्जी और न ही तृणमूल कांग्रेस ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों को बरुईपुर की अदालत में पेश किया जाएगा।
बाद में बनर्जी को कोलकाता के एक निजी अस्पताल में कुछ समय के लिए भर्ती कराया गया जहां प्राथमिक चिकित्सा के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।
इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘शासक हत्यारे बन गए हैं – भाजपा को शर्म आनी चाहिए!’’
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख, पार्टी नेताओं फिरहाद हाकिम और डेरेक ओ’ब्रायन के साथ उस अस्पताल भी पहुंचीं जहां अभिषेक भर्ती थे।
हमले की निंदा करते हुए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस तरह की घटनाएं एक स्वस्थ और सामान्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा का इसमें कोई हाथ नहीं है।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘भाजपा इस तरह की गतिविधियों में शामिल नहीं है। लेकिन जो कुछ हुआ वह वर्षों से प्रताड़ित स्थानीय लोगों के गुस्से का नतीजा हो सकता है।’’
भाषा सुरभि अमित
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