नागदोषम से लेकर जलदोषम तक, तमिलनाडु विधानसभा में छिड़ी मजेदार बहस

नागदोषम से लेकर जलदोषम तक, तमिलनाडु विधानसभा में छिड़ी मजेदार बहस

नागदोषम से लेकर जलदोषम तक, तमिलनाडु विधानसभा में छिड़ी मजेदार बहस
Modified Date: September 2, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: September 2, 2026 12:39 pm IST

चेन्नई, दो सितंबर (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को नागदोषम (सर्प दोष) और जलदोषम (सामान्य सर्दी-जुकाम) को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में मजेदार नोकझोंक देखने को मिली। यह चर्चा तब शुरू हुई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व द्रमुक नेता ओ. पनीरसेल्वम ने मजाकिया अंदाज में सुझाव दिया कि राज्य में हाल में सांप काटने की बढ़ती घटनाओं के पीछे कोई दैवीय दोष कारण हो सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री के. जी. अरुणराज ने ज्योतिषीय तर्क को खारिज करते हुए कहा कि राज्य विज्ञान के आधार पर काम करता है और इस समय वह किसी नागदोष से नहीं, बल्कि सामान्य सर्दी-जुकाम से निपट रहा है।

चर्चा की शुरुआत तब हुई, जब पनीरसेल्वम ने सदन में कई विधानसभा क्षेत्रों में हाल में सामने आई सांप के काटने की घटनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई इलाके संभवतः नाराज नागों के कारण हुए ‘‘नागदोषम’’ से पीड़ित हैं। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से दैवीय दोष को दूर करने के लिए सरकार की ओर से मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ कराने की व्यवस्था करने का आग्रह किया।

अरुणराज ने तुरंत जवाब देते हुए स्वास्थ्य बजट से सांपों को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ कराने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के बजाय चिकित्सा विज्ञान पर भरोसा करती है।

मंत्री ने कहा, ‘‘इस समय हम जिस व्यापक बीमारी पर नजर रख रहे हैं, वह सामान्य सर्दी-जुकाम यानी जलदोषम है, नागदोषम नहीं।’’

पनीरसेल्वम भी यहीं नहीं रुके और मजाकिया अंदाज में स्वास्थ्य मंत्रालय की मदद के लिए पूजा-पाठ करने वाले विशेषज्ञों की एक टीम उपलब्ध कराने की पेशकश कर दी।

इस हल्की-फुल्की नोकझोंक में लोक निर्माण एवं खेल मंत्री आधव अर्जुन भी शामिल हो गए। उन्होंने सदन को तर्कवादी नेता पेरियार के विचारों में राज्य की गहरी आस्था की याद दिलाई और कहा कि सरकार मंत्रों और अनुष्ठानों के बजाय तर्कवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करती है।

विपक्ष के नेता और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन ने बीच में हस्तक्षेप कर पूरे मामले को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ सदस्य पनीरसेल्वम का इशारा द्रमुक के उपनेता के. एन. नेहरू की ओर था, जो इस समय सर्दी-जुकाम से परेशान हैं।

इसके तुरंत बाद विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर ने इस बहस को समाप्त करते हुए पनीरसेल्वम को सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘‘सावधानी बरतिए, कहीं आपको खुद सर्दी-जुकाम न हो जाए।’’

इस हल्की-फुल्की बातचीत पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से जमकर ठहाके गूंजे।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा


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