एफएसएसएआई,शतप्रतिशत दावे पर आईटीसी के लाईसेंस रद्द नहीं करे: दिल्ली उच्च न्यायालय

एफएसएसएआई,शतप्रतिशत दावे पर आईटीसी के लाईसेंस रद्द नहीं करे: दिल्ली उच्च न्यायालय

एफएसएसएआई,शतप्रतिशत दावे पर आईटीसी के लाईसेंस रद्द नहीं करे: दिल्ली उच्च न्यायालय
Modified Date: August 25, 2026 / 04:24 pm IST
Published Date: August 25, 2026 4:24 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से कहा कि उसने आईटीसी लिमिटेड को उसके उत्पाद ‘आशीर्वाद एमपी का चक्की आटा’ के सिलसिले में शत-प्रतिशत संबंधी सभी दावों को हटाने का जो निर्देश दिया था, उसका पालन नहीं कर पाने को लेकर उसका लाइसेंस फिलहाल वह रद्द न करे।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने आईटीसी को अंतरिम राहत दी है। आईटीसी ने एफएसएसएआई के परामर्श एवं नोटिस को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। प्राधिकरण ने आईटीसी से कहा था कि अगर वह अपने उत्पाद के लिए ‘शत प्रतिशत’ शब्द का इस्तेमाल बंद नहीं करती है, तो उसका एफएसएसएआई लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा,‘‘चूंकि अधिकार-क्षेत्र से जुड़ा मामला तय किया जाना है और अदालतें बंद रहेंगी, इसलिए सुनवाई की अगली तारीख तक लाइसेंस रद्द करने के बारे में कोई फैसला नहीं किया जाए।’’

उच्च न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख नौ सितंबर तय की।

न्यायमूर्ति शर्मा ने यह भी कहा कि वह सोमवार, 31 अगस्त को एफएसएसएआई के खिलाफ एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड की एक अलग याचिका की विचारणीयता पर आदेश देंगी।

‘एडब्ल्यूएल एग्री बिज़नेस लिमिटेड’ को उसके उत्पाद ‘फॉर्च्यून सोया हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन ऑयल’ के लिए कथित तौर पर गुमराह करने वाली घोषणा और दावों को लेकर एफएसएसएआई से नोटिस मिले हैं। इनमें ‘शत प्रतिशत शाकाहार’ और ‘कोलेस्ट्रॉल फ्री – हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए’ जैसे दावे शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान एफएसएसएआई के वकील ने दिल्ली में आईटीसी की याचिका की विचारणीयता पर आपत्ति जताई और तर्क दिया कि हालिया सुधार नोटिस कोलकाता में जारी किया गया था।

मई 2025 में, एफएसएसएआई ने सभी खाद्य कारोबार संचालकों के लिए परामर्श पत्र जारी किया था तथा उनसे खाद्योत्पादों के लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में “शत प्रतिशत” के इस्तेमाल को बंद करने के लिए कहा था।

इसके बाद, 10 अगस्त को आईटीसी को एक नया नोटिस भेजा गया। इसमें उससे 30 दिनों के अंदर यह बताने को कहा गया कि परामर्श पत्र का पालन न करने पर उसके खिलाफ़ कार्रवाई क्यों न की जाए।

नोटिस में कहा गया कि लेबल पर “शतप्रतिशत आटा और शत प्रतिशत मध्यप्रदेश का गेहूं” और विज्ञापन में “सिर्फ़ एमपी गेहूं से बना” जैसे दावे भ्रामक है और नियमों के तहत इनकी इजाज़त नहीं है।

तीन दिन बाद, कोलकाता में केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने आईटीसी को एक सुधार नोटिस जारी किया। इसमें कंपनी को निर्देश दिया गया कि वह ‘आशीर्वाद एमपी चक्की आटा’ के सभी लेबल और विज्ञापनों से ‘शत प्रतिशत आटा और शत प्रतिशत मध्यप्रदेश गेहूं’ और ‘शून्य प्रतिशत मैदा’ वाले दावे या शब्द हटा ले।

सुधार नोटिस में कंपनी से 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा गया, अन्यथा एफएसएसएआई लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है।

आईटीसी ने अपनी याचिका में कहा कि प्राधिकरण ने आरोपों का जवाब देने के लिए जो 30 दिन का समय दिया था, उसके खत्म होने से पहले ही ‘सुधार नोटिस’ जारी कर दिया गया और असल में यह रोक लगाने का एक अंतिम आदेश था।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश

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