अदालत ने कहा : वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रमों के कामकाज की पड़ताल जरूरी

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अदालत ने कहा : वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रमों के कामकाज की पड़ताल जरूरी

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 07:11 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 07:11 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सोमवार को अवगत कराया कि स्वयंभू बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित की अब मृत्यु हो चुकी है, इसके बावजूद अदालत ने कहा कि दीक्षित के आश्रमों के कामकाज की जांच जरूरी है, क्योंकि समाज को वहां चल रही गतिविधियों के बारे में जानने का पूरा अधिकार है।

अदालत उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय आश्रम में कई महिलाओं और लड़कियों को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने के आरोपों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने दिल्ली के विजय विहार थाने के प्रभारी को गुमशुदगी का मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश दिया।

अदालत को आश्रम में रह रही महिलाओं की ओर से बताया गया था कि आश्रम में रहने वाली एक महिला लापता है, जबकि उनका सामान अब भी परिसर में रखा हुआ है।

सुनवाई के दौरान अदालत को सीबीआई के अधिवक्ता ने यह बताया कि दीक्षित लंबे समय से फरार था, लेकिन अब उसकी मृत्यु हो चुकी है।

पीठ ने कहा, “जब तक किसी की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होती है, अदालतें उनमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। यही एकमात्र कसौटी है, लेकिन किसी को भी जवाबदेही से मुक्त नहीं छोड़ा जा सकता। आश्रम के लोगों को (भी) जवाबदेही से मुक्त नहीं छोड़ा जा सकता। वहां कोई न कोई होना चाहिए और अगर कोई आगे नहीं आता है, तो राज्य इसे अपने अधीन ले लेगा।”

अदालत को बताया गया कि लापता महिला के माता-पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और वृद्धावस्था में उनकी देखभाल करने वाला कोई और नहीं है। वे अपनी बेटी से मिलना चाहते थे। उन्होंने महिला से वीडियो कॉल पर बात भी की थी, लेकिन उसने माता-पिता से मिलने से इनकार कर दिया था।

पीठ ने कहा, “हमारी राय है कि आश्रमों के कामकाज और जिस तरीके से उनका संचालन किया जा रहा है, उसकी जांच की जानी चाहिए।

अदालत ने कहा, “चूंकि प्रतिवादी संख्या चार (महिला आश्रमवासी) के लापता होने की बात कही गई है, जबकि उसका सामान और निजी वस्तुएं रोहिणी आश्रम में पड़ी हुई हैं, इसलिए हम विजय विहार थाने के प्रभारी को निर्देश देते हैं कि वह गुमशुदगी का मामला दर्ज करें और प्रतिवादी संख्या चार के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए जांच करें।”

अदालत ने थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि वह जांच पूरी करें और अगली सुनवाई की तारीख 31 अगस्त को उसके नतीजे से अदालत को अवगत कराएं।

पीठ ने कहा कि वह किसी की आस्था या विश्वास के आड़े नहीं आ रही है, लेकिन जवाबदेही तय होनी चाहिए।

पीठ ने कहा, “किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी। हम किसी की आस्था या आध्यात्मिक विश्वास के आड़े नहीं आ रहे हैं। हर व्यक्ति इसका पालन करने के लिए स्वतंत्र है, बशर्ते इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो, लेकिन जवाबदेही होनी चाहिए। किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी और किसी को जवाबदेह होना होगा।”

पीठ ने कहा कि समाज को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आश्रमों में वास्तव में किस तरह की गतिविधियां चल रही हैं।

लापता महिला के माता-पिता द्वारा दायर आवेदन में कहा गया है कि उसके पिता की हालत गंभीर है और वह अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने वीडियो कॉल के जरिये अपनी बेटी से बात की थी, जिसके दौरान उन्हें पता चला कि उसकी भी हालत खराब थी।

उनके अधिवक्ता ने दावा किया कि आश्रम में रहने वाली महिलाओं को नशीली दवाएं दी जा रही थी और वे किसी भी बात के लिए स्वतंत्र रूप से सहमति देने की मानसिक स्थिति में नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय आश्रम में रहने वाली कुछ आश्रमवासिनी नाबालिग हैं।

मामले के रिकॉर्ड देखने के बाद पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “अगर कोई नाबालिग आश्रमवासी है, तो क्या उसे आश्रम के लोगों के रहमोकरम पर छोड़ा जा सकता है?”

पीठ ने पूछा, “क्या हो रहा है? इतने चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इन चीजों को इस तरह कैसे छोड़ा जा सकता है? वह व्यक्ति (दीक्षित) फरार है और आश्रम चलाने की जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा है। आयकर विभाग को उनके खातों की जांच करने से क्या रोक रहा है? ये पैसे कहां से आ रहे हैं?”

यह आवेदन लंबित याचिकाओं के एक समूह में दायर किया गया था। इनमें एक महिला की मां द्वारा दायर याचिका भी शामिल है, जिसमें कहा गया था कि उनकी बेटी कुछ लोगों के प्रभाव में आश्रम में रह रही है।

इसके अलावा, एक बुजुर्ग दंपति ने भी याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी “अत्यधिक शिक्षित बेटी” को गुमराह करके वहां रहने के लिए प्रेरित किया गया है और वह “अतिरंजित धारणाओं” को पाल रही है।

अदालत ने इससे पहले कहा था कि दीक्षित के खिलाफ दुष्कर्म के गंभीर आरोप हैं और सीबीआई से वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।

सीबीआई के अधिवक्ता ने कहा था कि कथित दुष्कर्म के मामले में दीक्षित के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और उसे पकड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

वर्ष 2017 में गैर-सरकारी संगठन ‘फाउंडेशन फॉर सोशल एम्पावरमेंट’ ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि दीक्षित के रोहिणी स्थित “आध्यात्मिक विश्वविद्यालय” में कई नाबालिग लड़कियों और महिलाओं को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा जा रहा है और उन्हें अपने माता-पिता से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

अदालत ने पहले सीबीआई को दीक्षित का पता लगाने को कहा था और केंद्रीय एजेंसी को आश्रम में लड़कियों और महिलाओं को कथित तौर पर अवैध रूप से बंधक बनाए रखने की जांच का निर्देश दिया था।

इसके बाद सीबीआई ने अदालत को आश्वासन दिया था कि दीक्षित के ठिकाने का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उसके फार्महाउस और आश्रमों पर छापेमारी की गई थी तथा उसे गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया था।

भाषा रंजन रंजन सुरेश

सुरेश