गांधी के पत्र साझा विरासत का हिस्सा हैं, इनकी नीलामी नहीं होनी चाहिए: राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय
गांधी के पत्र साझा विरासत का हिस्सा हैं, इनकी नीलामी नहीं होनी चाहिए: राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय
नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) महात्मा गांधी के कई पत्रों, पांडुलिपियों और निजी वस्तुओं की नीलामी के कुछ दिन बाद राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक ए. अन्नामलाई ने कहा कि ऐसी वस्तुएं केवल निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि भारत की साझा विरासत का हिस्सा हैं।
उन्होंने इन वस्तुओं को अपने पास रखने वालों से इन्हें संरक्षण के लिए संस्थान को सौंपने की अपील की।
गांधी की 688 हस्तलिखित टिप्पणियों के संग्रह समेत कुल 86 वस्तुओं की नीलामी 19 अगस्त को ‘सैफरनार्ट’ नीलामी में की गई थी।
‘ए थॉट फॉर द डे’ शीर्षक वाला यह संग्रह गांधी ने अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को करीब दो वर्षों की अवधि में लिखा था। इसे 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया, जो नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए विश्व रिकॉर्ड है।
अन्नामलाई ने शनिवार को जारी एक बयान में इस खबर को ‘‘बेहद दुखद और पीड़ादायक’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए कुछ पत्रों और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखा गया था। खबरों के अनुसार, इससे मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।’’
गांधी संग्रहालय के निदेशक ने कहा कि गांधी के कई पत्र पहले ही पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं, लेकिन ‘‘मूल पत्रों और उनके हस्तलिखित दस्तावेजों का संरक्षण करना हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।’’
भाषा शफीक सुरेश
सुरेश

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