तंबाकू का महिमामंडन कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों की अगली महामारी को जन्म दे सकता है : विशेषज्ञ
तंबाकू का महिमामंडन कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों की अगली महामारी को जन्म दे सकता है : विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) स्वास्थ्य और शिक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अप्रत्यक्ष विज्ञापनों के माध्यम से तंबाकू का महिमामंडन और टॉफी एवं कैंडी के साथ इसकी खुलेआम बिक्री से बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रवृत्ति पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में कैंसर और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की एक नयी महामारी फैल सकती है।
यह चेतावनी राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित ‘‘द साइलेंट पुश: टोबैको एंड यंग इंडिया’’ नामक वेबिनार के दौरान दी गई, जिसका आयोजन स्वामी विवेकानंद की जयंती पर ‘टोबैको फ्री इंडिया’ द्वारा किया गया था।
वक्ताओं ने कहा कि यद्यपि भारत ने हाल के वर्षों में तंबाकू नियंत्रण के लिए कई सराहनीय कदम उठाए हैं, फिर भी 10 से 20 वर्ष की आयु के बच्चों और युवाओं को सूक्ष्म और अप्रत्यक्ष तरीकों से तेजी से निशाना बनाया जा रहा है।
आईसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बच्चे रोजमर्रा के प्रभावों के माध्यम से तंबाकू के संपर्क में कैसे आते हैं, जिसकी शुरुआत खुदरा दुकानों से होती है और अप्रत्यक्ष प्रचार तक फैली हुई है।
उन्होंने कहा, “जब तंबाकू उत्पादों को बिक्री केंद्रों पर खुलेआम प्रदर्शित किया जाता है और बच्चों के लिए बनी वस्तुओं के साथ रखा जाता है, तो इससे यह भ्रामक संकेत मिलता है कि ये उत्पाद हानिरहित हैं।” उन्होंने कहा कि अप्रत्यक्ष प्रचार इस तरह के जोखिम को और भी मजबूत करते हैं।
इंटरनेशनल पीडियाट्रिक एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवीन ठक्कर ने बाल स्वास्थ्य के परिप्रेक्ष्य से चेतावनी दी कि यह समस्या समय से कहीं पहले ही शुरू हो जाती है। गुजरात के गांधीनगर में उनके नेतृत्व में किए गए विभिन्न वर्गों के एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 10 वर्ष की आयु के छह बच्चों में से एक बच्चा पहले ही तंबाकू का सेवन कर चुका था।
इन्हीं चिंताओं को दोहराते हुए, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. एम.सी. मिश्रा ने चेतावनी दी कि निष्क्रियता के परिणाम गंभीर और दीर्घकालिक हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर हम आज हस्तक्षेप नहीं करते और बच्चों को तंबाकू के संपर्क में आने से नहीं रोकते, तो हम स्पष्ट रूप से कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों की अगली महामारी की ओर बढ़ रहे हैं।”
एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर जे.एस. राजपूत ने कहा कि मशहूर हस्तियों से जुड़े सरोगेट प्रमोशन (भ्रामक विज्ञापन) इस समस्या में एक और चिंताजनक पहलू जोड़ते हैं और उन्होंने सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “शिक्षा केवल कक्षाओं में ही नहीं होती। बच्चे समाज में जो देखते हैं उससे सीखते हैं।”
उन्होंने कहा, “जब फिल्म कलाकार या खेल जगत की हस्तियां अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू ब्रांडों से जुड़ती हैं, तो इससे एक सशक्त और भ्रामक संदेश जाता है। समाज और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
भाषा प्रशांत अविनाश
अविनाश

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