गोवा सरकार ने युवा किसान वरद सामंत को ‘कृषिदूत’ नियुक्त किया

गोवा सरकार ने युवा किसान वरद सामंत को ‘कृषिदूत’ नियुक्त किया

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 10:55 AM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 10:55 AM IST

पणजी, नौ जनवरी (भाषा) गोवा सरकार ने 32 वर्षीय किसान वरद सामंत को राज्य का कृषिदूत (कृषि ब्रांड एंबेसडर) नियुक्त किया है। सरकार सांमत के अब तक के सफर के बारे में बताकर गोवा के युवाओं को यह संदेश देना चाहती है कि खेती लाभदायक और सतत हो सकती है।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि सामंत की यात्रा यह दिखाती है कि नवाचार, मशीनीकरण और सरकारी सहयोग के साथ कृषि में अपार संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने बागवानी विभाग द्वारा सामंत से खरीदी गई फसलों का उल्लेख करते हुए कहा, “पिछले तीन वर्षों में हमने उन्हें 65 लाख रुपये, 60 लाख रुपये और 58 लाख रुपये का भुगतान किया है। यह इसलिए नहीं था कि वे बाहर से सब्जियां लाते थे, बल्कि इसलिए कि उन्होंने गोवा में ही अपनी फसल उगाई।”

सामंत के पिता शुरू से ही खेती करते थे, लेकिन सामंत के 2012 में बी.कॉम करने के बाद, कृषि उनके करियर की योजना का हिस्सा नहीं थी। उनका परिवार 2010 से 2014 के बीच गन्ने की खेती करता था, लेकिन इसके बाद उन्होंने सब्जी उत्पादन की संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं।

युवा किसान ने कर्नाटक और महाराष्ट्र का भ्रमण कर वहां की बेहतर कृषि पद्धतियों का अध्ययन किया और गोवा लौटकर प्रयोग शुरू किए। उन्होंने करीब दो बीघा जमीन पर भिंडी की खेती से शुरुआत की जो सफल रही। इसके बाद उन्होंने खीरा, गाजर, पत्तागोभी और अन्य सब्जियों की खेती शुरू की।

धारबांदोडा निवासी सामंत ने कहा, “तभी मुझे एहसास हुआ कि गोवा में सब्जी की खेती पूरी तरह संभव है।”

वर्तमान में सामंत करीब 10 एकड़ भूमि पर सब्जियां उगाते हैं, जहां पारंपरिक ज्ञान के साथ मशीनीकृत और कुशल कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने पत्तागोभी (70 दिन की फसल), गाजर (20 दिन) और तरबूज (करीब 60 दिन) की खेती की है।

सामंत ने बताया कि उनकी सालाना आय 50 से 60 लाख रुपये के बीच है और श्रम व अन्य खर्चों के बाद किसानों को 25 से 30 प्रतिशत तक मुनाफा हो सकता है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि सामंत के अनुसार उनका शुद्ध लाभ इससे भी अधिक है। सावंत ने कहा, “जब मैंने उनसे खर्चों के बाद के लाभ के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि केवल सब्जी की खेती से ही उन्हें करीब 30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है।”

भाषा खारी मनीषा

मनीषा