पणजी, 24 जून (भाषा) गोवा सरकार ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय में दलील दी कि यौन उत्पीड़न के मामले में निचली अदालत द्वारा ‘तहलका’ पत्रिका के संस्थापक-संपादक तरुण तेजपाल को बरी किया जाना सबूतों के गलत मूल्यांकन पर आधारित था।
सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अमित बोरकर जमसांडेकर और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ से निचली अदालत के फैसले की बारीकी से पड़ताल करने का आग्रह किया।
बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ तेजपाल के बरी होने के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी।
यह मामला तेजपाल की एक पूर्व महिला सहकर्मी के आरोपों से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2013 में गोवा में ‘तहलका’ पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान, तेजपाल ने होटल की लिफ्ट में उसका यौन उत्पीड़न किया था।
वर्ष 2021 में, सत्र अदालत ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता का ऐसा कोई व्यवहार नहीं दिखा, जैसा यौन उत्पीड़न की शिकार महिला का होता है।
शिकायतकर्ता के आचरण और व्यवहार पर की गई टिप्पणियों के कारण निचली अदालत के फैसले की कई तरफ से आलोचना हुई।
मेहता ने दलील दी कि रिकॉर्ड निचली अदालत के निष्कर्षों का समर्थन नहीं करता है और ये निष्कर्ष रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के विपरीत हैं, जो अदालत के सामने रखी गई सामग्री की गलत समझ को दर्शाता है।
तेजपाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने दलील दी कि बचाव पक्ष को उन सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक संचार, डीवीआर और दूसरे सबूतों तक पहुँच मिलनी चाहिए, जिनके आधार पर फैसला सुनाया गया है।
भाषा नेत्रपाल माधव
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