गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: उच्च न्यायालय ने क्लब के मालिकों की जमानत रद्द की

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: उच्च न्यायालय ने क्लब के मालिकों की जमानत रद्द की

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: उच्च न्यायालय ने क्लब के मालिकों की जमानत रद्द की
Modified Date: August 18, 2026 / 07:37 pm IST
Published Date: August 18, 2026 7:37 pm IST

पणजी, 18 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने गोवा के ‘रोमियो लेन’ नाइटक्लब में पिछले साल दिसंबर में लगी आग में 25 लोगों की मौत मामले में आरोपी क्लब मालिकों और एक कारोबारी साझेदार की जमानत मंगलवार को रद्द कर दी।

अदालत ने आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की एकल पीठ ने यह आदेश निचली अदालत द्वारा आरोपियों को जमानत देने के खिलाफ की गई अपील पर सुनवाई के दौरान दिया।

गोवा के ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में 6 दिसंबर 2025 को आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 अन्य झुलस गए थे।

सौरव और गौरव लूथरा, अपने कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता के साथ, बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी में साझेदार थे, जो नाइटक्लब का परिचालन करती थी।

सुनवाई अदालत ने इस साल अप्रैल में तीनों आरोपियों को जमानत दे दी थी।

बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने मंगलवार को उन्हें सुनवाई अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया। साथ ही उन्हें निचली अदालत में नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी।

अभियोजन पक्ष की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सोमनाथ कार्पे ने संवाददाताओं से कहा कि अदालत ने जमानत खारिज करने की सभी पांचों अर्जियों को मंजूरी दे दी है जिनमें से तीन अर्जियां आग लगने की घटना के मामले में गैर-इरादतन हत्या के तीन आरोपियों से जुड़ी हैं जबकि दो अर्जियां नाइटक्लब के लिए मंजूरी लेने से संबंधित धोखाधड़ी के मामले के आरोपियों से संबंधित हैं।

अभियोजन पक्ष ने लूथरा बंधुओं और गुप्ता को दी गई जमानत को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि उन पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

इस मामले में दाखिल आरोप पत्र के अनुसार, आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या, इंसानी जान को खतरे में डालने वाले कृत्य, आग और ज्वलनशील पदार्थों के मामले में लापरवाही, जालसाजी, नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश


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