नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) दिल्ली पुलिस ने अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह की मदद करने के आरोप में शनिवार को 27 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसने लाखों रुपये को बकरीद के दौरान बकरे के कारोबार से हुई कमाई बताकर संदिग्ध लेन-देन को सही ठहराने की कोशिश की थी। अधकिारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि चांदनी महल पुलिस ने मध्य दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके के मुहीद को गिरफ्तार किया है।
उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं का ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) पर दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता चला था।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने पाया कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों में से एक मुहीद का है तथा पूछताछ करने पर उसने दावा किया कि ये लेन-देन ईद के दौरान बकरियों की खरीद-बिक्री से संबधित हैं।
पुलिस ने कहा कि बैंक विवरण, पेटीएम रिकॉर्ड, यूपीआई और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच से पता चला कि उसका यह स्पष्टीकरण गलत है, जिसका मकसद पैसे के असली स्रोत को छिपाना है।
बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के बाद, चांदनी महल थाने ने जांच शुरू की।
पुलिस ने बताया कि जांच से पता चला कि धोखाधड़ी करने वाला गिरोह एक मोबाइल ‘एपीके’ ऐप के ज़रिए काम करता था, जिसमें दो ‘इंटरफेस’ जुड़े हुए थे।
पुलिस ने कहा कि गिरोह के सदस्य कथित तौर पर एक ‘इंटरफेस’ का इस्तेमाल बैंक खाते का पंजीकरण करने और धोखाधड़ी से मिली रकम का प्रबंधन करने के लिए करते थे।
पुलिस के मुताबिक, वे दूसरे ‘इंटरफेस’ का इस्तेमाल कथित रूप से कर्नाटक और दूसरे राज्यों के लोगों को ज़्यादा मुनाफ़े का वादा करके धोखाधड़ी वाली निवेश योजना में फंसाने के लिए करते थे।
पुलिस के अनुसार अपराधियों ने पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए शुरु में उनके खातों में छोटा-मोटा रिटर्न भेजा और फिर उन्हें लाखों रुपये जैसी बड़ी रकम निवेश करने के लिए मनाया।
पुलिस ने बताया कि जब बड़ी रकम जमा हो गई, तो ऐप बंद हो गया और पीड़ितों के पैसे डूब गए।
पुलिस के अनुसार जांचकर्ताओं को पता चला कि धोखाधड़ी से हासिल किए गए पैसे को सिंडिकेट के सदस्यों के बैंक खातों (जिनमें मुहीद का खाता भी शामिल था) के जरिए इधर-उधर किया जाता था। आरोप है कि मुहीद ने पैसे नकद में निकाले, अपना कमीशन रखा और बाकी रकम दूसरे साथियों को सौंप दी।
पुलिस ने बताया कि जब मुहीद के अपने खाते की विनिमय सीमा पूरी हो गई, तो उसने पैसे लेने और निकालने के लिए अपने पिता के बैंक खाते का भी इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, एनसीआरपी पोर्टल के ज़रिए जांच में आरोपी से जुड़ी दो और शिकायतें सामने आईं, जिससे पता चलता है कि वह अलग-अलग राज्यों में कम से कम तीन साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शामिल था।
पुलिस ने कहा कि अंतर-राज्यीय सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने, तथा उनके कामकाज के पूरे दायरे का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश