सरकार ने औषधि नियामकों को ‘‘जीएलपी-1’’ दवाओं की निगरानी कड़ी करने को कहा

सरकार ने औषधि नियामकों को ‘‘जीएलपी-1’’ दवाओं की निगरानी कड़ी करने को कहा

सरकार ने औषधि नियामकों को ‘‘जीएलपी-1’’ दवाओं की निगरानी कड़ी करने को कहा
Modified Date: August 4, 2026 / 05:59 pm IST
Published Date: August 4, 2026 5:59 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियामकों को निर्देश दिया है कि वे वजन कम करने वाली ‘‘जीएलपी-1’’ दवाओं की आपूर्ति शृंखला और उनके विज्ञापन पर कड़ी नज़र रखें। यह कदम भ्रामक जागरूकता अभियानों को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच उठाया गया है।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने भारत में ‘‘ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1’’ (जीएलपी-1) दवाओं को वयस्कों में टाइप 2 डायबिटीज और विशिष्ट चिकित्सीय स्थितियों वाले वयस्कों में वजन प्रबंधन के लिए अनुमोदित किया है।

उन्होंने कहा कि ये दवाएं केवल चिकित्सा विशेषज्ञों की पर्ची पर ही दी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि मंजूर किए गए उत्पाद की जानकारी में चेतावनियां दी गई हैं ताकि इनके गलत इस्तेमाल को रोका जा सके और बिना डॉक्टर की देखरेख में इनके इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।

उनसे सवाल किया गया था कि क्या जागरूकता के नाम पर वजन घटाने वाली दवाओं के विज्ञापन निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हैं और क्या यह भी सच है कि जीएलपी-1 दवाओं का सूक्ष्म प्रचार अभियानों एवं सोशल मीडिया प्रचार के माध्यम से तेजी से प्रसार हो रहा है, जिससे मोटापे के उपचार के नाम पर परोक्ष (सरोगेट) विज्ञापन किया जा रहा है?

मंत्री ने कहा कि जीएलपी – 1 और समान पर्चीवाले दवाओं से संबंधित कुछ प्रचार कार्यकलापों की रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए, सीडीएससीओ ने इस साल 10 मार्च को सभी निर्माताओं, आयातकों और विपणन प्राधिकरण धारकों के लिए परामर्श जारी किया है। इस परामर्श में उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि इस परामर्श में विशेष रूप से परोक्ष विज्ञापनों और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रचार के किसी भी रूप को प्रतिबंधित किया गया है, जिसमें रोग के प्रति जागरूकता अभियान शामिल हैं, जो उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं या चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के बिना इन दवाओं के उपयोग को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

पटेल ने कहा कि इसके अलावा सीडीएससीओ ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों के लिए 27 मार्च 2026 को एक परामर्श जारी किया है, जिसमें इस प्रकार की दवाओं के अनुचित उपयोग से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए विभिन्न उपाय निर्धारित किए गए हैं।

भाषा अविनाश वैभव

वैभव


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