Assam Divorce Pay Cut Rule: इन सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगी 20% की कटौती, प्राइवेट नौकरी वालों के लिए लागू होगा नियम, इस वजह से लाया गया नया कानून

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Assam Divorce Pay Cut Rule: इन सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगी 20% की कटौती, प्राइवेट नौकरी वालों के लिए लागू होगा नियम, इस वजह से लाया गया नया कानून
Modified Date: August 20, 2026 / 05:57 pm IST
Published Date: August 20, 2026 5:34 pm IST

गुवाहाटी। Employees 20 Percent Salary Cut सरकारी कर्मचारियों को लेकर अब बड़ी खबर सामने आई है। अब एक गलती करने पर 20% सैलरी काटी जा सकती है। दरअसल, असम में पहली पत्नी को कानूनी तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों की 20% सैलरी काटकर पहली पत्नी के बैंक खाते में जमा की जा सकती है। सरकार इसे प्राइवेट सेक्टर में लागू कर सकती है

Employees 20 Percent Salary Cut सीएम सरमा के मुताबिक पहली पत्नी को इसके लिए सरकार के पास आवेदन करना होगा। सरकार के सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें कर्मचारियों ने तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना पहली पत्नी को छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहना शुरू कर दिया। ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार इस व्यवस्था पर विचार कर रही है।

एक से ज्यादा शादी पर लग चुकी है रोक

सरमा ने कहा कि जब तक मामला कोर्ट में है, सैलरी में कटौती जारी रह सकती है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि पहली पत्नी को कानूनी कार्रवाई पूरी होने तक बिना पैसे की मदद के इंतजार न करना पड़े। सरमा ने कहा कि सरकार उन कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू करेगी जो लागू कानून और सर्विस नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे। यह प्रस्तावित कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब असम एक से ज्यादा शादी के खिलाफ अपने कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव ढांचे को सख्त करने की कोशिश कर रहा है। असम ने अपने UCC के जरिए पहले ही एक से ज्यादा शादी पर रोक लगा दी है।

प्राइवेट सेक्टर में भी लागू हो सकता है नियम

असम पहले ही एक से ज्यादा शादी पर रोक लगाने वाले नियमों को अपने सिविल-लॉ ढांचे में ला चुका है, जबकि सरकारी सर्विस नियम दूसरी शादियों पर भी रोक लगाते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार प्राइवेट सेक्टर में महिलाओं को भी इसी तरह की सुरक्षा देने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को इसके दायरे में लाने के लिए एक कानूनी कदम पर विचार किया जा रहा है।इस प्रस्ताव का मकसद यह पक्का करना है कि जिन महिलाओं को उनके पति बिना किसी फॉर्मल तलाक के छोड़ देते हैं, उन्हें तब तक फाइनेंशियल मदद के बिना न छोड़ा जाए, जब तक उनके मामलों को कानूनी तौर पर निपटाया जा रहा हो। असम उत्तराखंड और गुजरात के बाद तीसरा राज्य है। जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किया है। पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी यूसीसी लागू करने के लिए काम कर रही है।

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।