सरकार की बचाव अभियानों के लिए मानवरहित विमान विकसित करने की योजना

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सरकार की बचाव अभियानों के लिए मानवरहित विमान विकसित करने की योजना

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 05:35 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 05:35 PM IST

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) सरकार ने वायु सेना के लिए एक मानवरहित लड़ाकू तलाशी और बचाव विमान की डिजाइन तैयार करने और उसे विकसित करने पर विचार किया है, जिसका इस्तेमाल पायलट वाले विमानों को जोखिम में डाले बिना विमान कर्मियों को बचाने के मिशन में किया जा सके। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि योजना के मुताबिक स्वदेशी स्वचालित यान एक ऐसा मंच भी होना चाहिए जिसे अग्रिम क्षेत्रों और दुर्गम भूभागों में साजो-सामान और दूसरी आपूर्ति के लिए तैनात किया जा सके, जिसमें बर्फीली ऊंचाई वाली जगहें भी शामिल हैं, जहां पारंपरिक हेलीकॉप्टरों को मुश्किल होती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 के तहत परिकल्पित इस परियोजना को ‘‘सैद्धांतिक रूप से मंजूरी’’ मिल गई है।

परियोजना की जानकारी रखने वाले एक और अधिकारी ने कहा कि इस कदम का मकसद रक्षा क्षेत्र में देश की ‘आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा देना और भारतीय वायु सेना की लड़ाकू तैयारी को मजबूत करना भी है।

अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना के तहत, एक ‘रनवे-इंडिपेंडेंट यूएवी (मानवरहित वायुयान)’-लड़ाकू तलाशी और बचाव (सीएसएआर) ड्रोन डिज़ाइन और विकसित किया जाना है जो ‘‘अभियानों में जा सके, और मानवयुक्त विमानों को जोखिम में डाले बिना विमान कर्मियों को बचा सके।’’

उन्होंने कहा कि परियोजना ‘मेक-आई’ श्रेणी के तहत तैयार की गई है, जिसमें सरकार इसे तैयार करने की 70 प्रतिशत लागत का वहन करती है, जबकि बाकी 30 प्रतिशत की पूर्ति भारतीय विक्रेता करते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि इसके सफल विकास के बाद, खरीद प्रक्रिया में ‘बाय (भारतीय-आईआईडीएम)’ रूट का अनुसरण किया जाएगा, जिससे सामग्री, घटकों और सॉफ्टवेयर में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामान होगा।

भाषा वैभव माधव

माधव