राज्यपाल ने कर्नाटक सरकार को तीसरी भाषा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली पर पुनर्विचार के निर्देश दिए

राज्यपाल ने कर्नाटक सरकार को तीसरी भाषा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली पर पुनर्विचार के निर्देश दिए

राज्यपाल ने कर्नाटक सरकार को तीसरी भाषा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली पर पुनर्विचार के निर्देश दिए
Modified Date: April 3, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: April 3, 2026 3:22 pm IST

बेंगलुरु, तीन अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के राज्यपाल ने ‘सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट’ (एसएसएलसी) परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए अंक के बजाए केवल ग्रेड दिए जाने के राज्य सरकार के निर्णय की व्यापक पड़ताल करने को कहा है।

यह आग्रह ऐसे समय में किया गया है जब एक आवेदन के जरिए शैक्षणिक सहभागिता और भाषाई विविधता पर इस निर्णय के संभावित प्रभाव की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया गया था।

राज्यपाल के सचिव आर. प्रभु शंकर ने राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को भेजे गए एक पत्र में बेंगलुरु स्थानीय भाषाओं के संरक्षण संघ द्वारा प्रस्तुत एक अभ्यावेदन को अग्रेषित किया। इस संघ ने छात्रों, शिक्षकों और व्यापक शिक्षा प्रणाली पर नीति के प्रभावों के बारे में आशंकाएं व्यक्त की थीं।

पत्र में कहा गया है, ‘‘मुझे बेंगलुरु स्थानीय भाषाओं के संरक्षण संघ द्वारा कर्नाटक के राज्यपाल को प्रस्तुत एक अभ्यावेदन की प्रति संलग्न करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें एसएसएलसी परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए अंक शामिल किए बिना केवल ग्रेड प्रदान करने के हालिया निर्णय के संबंध में चर्चा की गई है।’’

इस अभ्यावेदन ने छात्रों के बीच भाषाई विविधता, जागरूकता और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने में तीसरी भाषा के महत्व पर जोर दिया गया है। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि केवल ग्रेडिंग प्रणाली में बदलाव अनजाने में इस विषय के अकादमिक महत्व को कम कर सकता है और छात्रों की इसमें गंभीरता से भाग लेने की प्रेरणा को प्रभावित कर सकता है।

पत्र में कहा गया है, ‘‘राज्यपाल ने अभ्यावेदन में उठाए गए मुद्दों पर ध्यान दिया है और उन्होंने इच्छा व्यक्त की है कि शिक्षा क्षेत्र में इसके शैक्षणिक और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की व्यापक रूप से जांच की जाए।

पत्र में मुख्य सचिव से विद्यालय शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के परामर्श से इस मामले की जांच करने का आग्रह किया गया है।

भाषा यासिर नरेश

नरेश


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