तिरुवनंतपुरम, 17 जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार को विश्वविद्यालयों के मामलों में राज्यपाल के हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा को प्रभावित करने वाले कदमों का विरोध करने में सरकार विफल रही है।
राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल लंबे समय से विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति और सीनेट व सिंडिकेट में नामांकन जैसे मुद्दों को लेकर लगातार एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों से टकराव में रहे हैं।
दोनों मोर्चों ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विश्वविद्यालयों के प्रमुख निकायों में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों को नियुक्त किया है।
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन द्वारा सांसदों से संसद में प्रस्तावित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक’ का विरोध करने की अपील से जुड़े सवाल पर विजयन ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा क्षेत्र के सामने कई गंभीर मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा, ‘केरल के मामले में उच्च शिक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ी परेशानी राज्यपाल ने पैदा की है। एमजी विश्वविद्यालय, कुलपतियों की नियुक्ति और विश्वविद्यालयों से जुड़े अन्य मामलों में उनके रुख को देखिए। इन मुद्दों पर यूडीएफ सरकार ने क्या रुख अपनाया है?’’
माकपा के वरिष्ठ नेता ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों की सीनेट का पुनर्गठन करके ‘संघ परिवार’ के समर्थकों को शामिल किया गया है।
उन्होंने सवाल किया, ‘क्या ऐसे कदमों पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए? क्या हमें यह कहते हुए चुपचाप खड़े रहना चाहिए कि हम टकराव नहीं चाहते?’
प्रस्तावित वीबीएसए विधेयक का जिक्र करते हुए विजयन ने कहा कि एलडीएफ इसका विरोध करेगा।
उन्होंने कहा, ‘जब ऐसा विधेयक आएगा तो हम इसका विरोध करेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।’
विजयन ने मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमडीआरएफ) से सहायता वितरण के लिए ऑनलाइन प्रणाली में बदलाव की कथित योजना की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि पिछली एलडीएफ सरकार द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन व्यवस्था ने राजनीतिक सिफारिशों की जरूरत खत्म कर दी थी। इसके तहत लोग डिजिटल माध्यम से आवेदन और संबंधित दस्तावेज जमा कर सकते थे और पात्रता के आधार पर सहायता मंजूर की जाती थी।
केरल विधानसभा में विपक्ष के उपनेता पद के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की मांग पर विजयन ने दोहराया कि यह मुद्दा पहले ही सुलझ चुका है।
उन्होंने कहा, ‘मैं उसी रुख पर कायम हूं। यह मामला खत्म हो चुका है। क्या इससे पहले कभी केरल में ऐसा कोई मुद्दा उठा है? जब कोई मुद्दा ही नहीं है, तो चर्चा किस बात की होगी?’
इस मामले पर एलडीएफ संयोजक टीपी रामकृष्णन के भाकपा प्रदेश सचिव बिनॉय विश्वम से मिलने के फ़ैसले के बारे में पूछे जाने पर विजयन ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
भाषा राखी शफीक
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