सरकार भारत को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध: सावित्री ठाकुर

सरकार भारत को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध: सावित्री ठाकुर

सरकार भारत को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध: सावित्री ठाकुर
Modified Date: July 28, 2026 / 05:53 pm IST
Published Date: July 28, 2026 5:53 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा है कि सरकार सामाजिक संगठनों के सहयोग से वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है।

ठाकुर ने सोमवार को यहां कान्स्टिट्यूशन क्लब में बाल अधिकारों पर आयोजित चार-दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत कई पहल लागू की जा रही हैं।

‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का उद्देश्य वर्ष 2026 तक बाल विवाह की घटनाओं में 10 प्रतिशत की कमी लाना और वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।

ठाकुर ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों की बच्चों को शोषण, तस्करी, बाल विवाह और दुर्व्यवहार से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा, ‘‘एक बच्चे का जीवन बचाना भी सबसे महान कार्यों में से एक है। कई छोटी लड़कियां तस्करी की शिकार हो जाती हैं और कभी अपने घर वापस नहीं लौट पातीं। ये बच्चे किसी ऐसे व्यक्ति का इंतजार करते हैं जो उन्हें बचा सके। यौन शोषण से उन्हें बचाने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के स्वयंसेवक किसी देवदूत से कम नहीं हैं।’

ठाकुर ने ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में संगठन का योगदान हमेशा ‘अविस्मरणीय’ रहेगा।

‘बाल अधिकार, क्षमता और समृद्धि सुनिश्चित करना’ विषय पर आयोजित चार-दिवसीय परामर्श कार्यक्रम में देश के सभी 782 जिलों में काम कर रहे 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करना और बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाना है।

‘एमपीज फॉर चिल्ड्रन फोरम के संयोजक एवं लोकसभा में तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता लवु कृष्ण देवरायलु ने कहा कि भारत का बाल विवाह विरोधी अभियान दुनिया के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा, ‘यह एक असाधारण अभियान है। भारत ने दिखाया है कि बाल विवाह को समाप्त करना संभव है और ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ द्वारा शुरू किया गया अभियान अब देश की सीमाओं से बाहर भी लोगों को प्रेरित कर रहा है।’’

देवरायलु ने बच्चों के समक्ष उत्पन्न नये खतरों से निपटने की जरूरत पर जोर देते हुए संसद में पेश अपने निजी सदस्य विधेयक का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य बच्चों को सामाजिक मीडिया से जुड़े जोखिमों से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करना है।

‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ के संस्थापक भुवन रिभु ने कहा कि 27 नवंबर, 2024 को शुरू किया गया ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान न्याय, तकनीक, नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से बच्चों को सशक्त बनाने वाला देशव्यापी आंदोलन बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘जब भी हम किसी गांव में एक बाल विवाह रोकते हैं, तो हम केवल एक बच्चे की रक्षा नहीं करते, बल्कि पूरे समुदाय को स्पष्ट संदेश देते हैं कि बाल विवाह अपराध है और आधुनिक समाज में इसकी कोई जगह नहीं है। पिछले तीन वर्षों में हमने मिलकर 5.5 लाख से अधिक बाल विवाह रोकने में सफलता हासिल की है।’

भाषा अमित/हक सुरेश

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