नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को भाजपा सदस्यों ने सरकार के उभयलिंगी लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध होने का दावा करते हुए विपक्ष पर इस संबंध में घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया और कहा कि वे जब सत्ता में थे तो उन्होंने इस समुदाय के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
उच्च सदन में उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के भीम सिंह ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोग भी समाज के अंग हैं और यह सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
सिंह ने कहा कि सरकार ने समुदाय के हितों के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना चाहते हुए कहा कि वह घड़ियाली आंसू बहा रही है और उसे बताना चाहिए कि वह जब सरकार में थी तो उसने क्या कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि इसी सरकार ने उन्हें सशक्त बनाने के लिए कदम उठाए और विधेयक का उद्देश्य यह है कि इस समुदाय के खिलाफ कोई अपराध नहीं हो और न ही इस समुदाय के द्वारा अपराध हो।
सिंह ने कहा कि 2021 में एक घटना हुई थी जिसमें 13 साल के बच्चे का अपहरण कर उसे जबरिया ट्रांसजेंडर बनाया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए। सरकार का मानना है कि न तो समुदाय पर अत्याचार ना हो और ना ही उनके द्वारा अत्याचार हो।
उन्होंने महाभारत में अर्जुन द्वारा बृहन्नला का रूप धारण किए जाने का जिक्र करते हुए सरकार को सुझाव दिया कि इस कानून का नाम उसी चरित्र के नाम पर बृहन्नला कानून रखा जाए।
विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सदस्य मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में करीब 4.88 लाख लोग उभयलिंगी है, हालांकि यह आंकड़ा पुराना है और वास्तविक संख्या इससे बहुत ज्यादा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि कई बार जांच में पता चला है कि ऐसे समुदाय के कथित सदस्य दिन में दिन में पैसे मांगते हैं और रात में सामान्य जीवन जीते हैं और उनके अपने बच्चे भी हैं।
उन्होंने कहा कि फर्जी पहचान के मामलों में दोषी को सजा मिलनी चाहिए वहीं असली लोगों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। भाजपा सदस्य ने कहा कि जो जन्म से उभयलिंगी हैं, उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, इसीलिए यह कानून लाया गया है।
कुलकर्णी ने कहा कि यह प्रमाणित कौन करेगा कि कौन इस समुदाय के जन्मजात सदस्य हैं या उनमें बाद में बदलाव किया गया है। इसके लिए विधेयक में प्रावधान किए गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के परमार जसवंतसिंह सालमसिंह ने कहा कि हर बच्चे के जन्म के बाद उसे जन्म प्रमाणपत्र दिया जाता है जिसमें उसके बारे में आवश्यक ब्यौरा होता है।
उन्होंने कहा ‘‘एक व्यक्ति अपने बारे में क्या महसूस करता है, इस बारे में कोई दूसरा हस्तक्षेप नहीं कर सकता। यह उसका अपना अधिकार है जिसे संविधान से सुरक्षा मिलती है। लेकिन अगर वह सरकारी काउंटर पर जा कर आरक्षण, लाभ की मांग करता है तो वह ‘सार्वजनिक डोमेन’ पर आ जाता है और तब उसे उसकी मांग के लिए, नियमों का पालन करना होता है।’’
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति व जनजाति के लोग भी अगर अपने लिए आरक्षण या अन्य मांग करते हैं, तो उनकी मांग तत्काल स्वीकार करने के बजाय उनसे प्रमाणपत्र मांगा जाता है। ‘‘यही तर्क इस कानून में भी लागू होगा।’’
उन्होंने कहा ‘‘विधेयक में उभयलिंगी की जो परिभाषा दी गई है वह महत्वपूर्ण है।’’
भाजपा के सुभाष बराला ने कहा कि हर शुभ काम के पहले किन्नर समुदाय के लोगों को बुला कर उनका मान सम्मान करने की परंपरा आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि कुंभ में किन्नर अखाड़े को पहली बार मान्यता दी गई।
चर्चा में भाजपा के अमर पाल मौर्य और झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी ने भी हिस्सा लिया।
भाषा
अविनाश मनीषा
मनीषा