सरकार एफसीआरए विधेयक संसद की संयुक्त समिति को भेजने पर विचार कर रही : सूत्र

सरकार एफसीआरए विधेयक संसद की संयुक्त समिति को भेजने पर विचार कर रही : सूत्र

सरकार एफसीआरए विधेयक संसद की संयुक्त समिति को भेजने पर विचार कर रही : सूत्र
Modified Date: August 11, 2026 / 06:30 pm IST
Published Date: August 11, 2026 6:30 pm IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) सरकार ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है, हालांकि कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इसे वापस लेने की मांग की है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस उन पार्टियों में शामिल थीं जिन्होंने यह मुद्दा उठाया, हालांकि यह एजेंडा का हिस्सा नहीं था। इन दलों ने सवाल किया कि एफसीआरए विधेयक को सदन में कब लाया जाएगा। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि इस बारे में उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।

इन दोनों पार्टियों ने विधेयक को वापस लेने की मांग की, लेकिन बीजद जैसे अन्य दलों का मानना है कि विधेयक को व्यापक चर्चा के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि द्रमुक भी विधेयक को वापस लिए जाने के पक्ष में है।

यह विधेयक इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था जिसमें देश में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा विदेशी वित्तपोषण पर सरकार की कड़ी निगरानी का प्रस्ताव है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि वह इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है और इस संबंध में बुधवार को लोकसभा में प्रस्ताव लाया जा सकता है।

एफसीआरए विधेयक पर आपत्ति जताने वाले विपक्षी दलों का आरोप है कि यह अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है क्योंकि इसके कुछ प्रावधान ईसाई एनजीओ और अल्पसंख्यक-संचालित सामाजिक कल्याण व शैक्षणिक संस्थानों के लिए वैध वित्तपोषण को बाधित कर देंगे।

लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रस्तावित कानून किसी विशेष धर्म से जुड़ा नहीं है और इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान को विनियमित करना है।

राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक की अध्यक्षता सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने की और इसमें संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, सदन के नेता जे. पी. नड्डा तथा विपक्षी नेता जयराम रमेश (कांग्रेस), तिरूची शिवा (द्रमुक) और सस्मित पात्रा (बीजद) शामिल हुए।

बैठक के दौरान, बीएसी ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के लिए दो घंटे; न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 के लिए दो घंटे; राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए तीन घंटे; और केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 के लिए 1.5 घंटे का समय आवंटित किया।

बाद में, उपसभापति हरिवंश ने सदन में बीएसी के निर्णयों की घोषणा की।

भाषा अविनाश वैभव

वैभव


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