नेताजी पर विवादित टिप्पणी के विरोध में तृणमूल के कार्यक्रम में ममता के खिलाफ लगे ‘चोर-चोर’ के नारे

नेताजी पर विवादित टिप्पणी के विरोध में तृणमूल के कार्यक्रम में ममता के खिलाफ लगे ‘चोर-चोर’ के नारे

नेताजी पर विवादित टिप्पणी के विरोध में तृणमूल के कार्यक्रम में ममता के खिलाफ लगे ‘चोर-चोर’ के नारे
Modified Date: August 11, 2026 / 07:13 pm IST
Published Date: August 11, 2026 7:13 pm IST

कोलकाता, 11 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मंगलवार को कोलकाता में ‘चोर-चोर’ के नारों का सामना करना पड़ा। इससे कुछ दिन पहले उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद की कथित विवादित टिप्पणी के विरोध में आयोजित तृणमूल कांग्रेस के कार्यक्रम में यह घटना हुई, जिससे एक बार फिर राजनीतिक टकराव की स्थिति बन गई।

बनर्जी उत्तर कोलकाता के श्यामबाजार पांचमाथा चौराहे पर स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस का चित्र लेकर पहुंचीं और नेताजी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम भाजपा सांसद की कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में तृणमूल की ओर से आयोजित किया गया था।

यह विवाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य नागेंद्र राय की टिप्पणियों से शुरू हुआ, जिन्हें अनंत महाराज के नाम से भी जाना जाता है। राय ने नेताजी को कथित तौर पर ‘युद्ध अपराधी’ बताया था, उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आजाद हिंद फौज की भूमिका पर भी संदेह जताया था।

पश्चिम बंगाल भाजपा नेताओं ने इन टिप्पणियों से खुद को अलग करते हुए कहा है कि राय के बयान पूरी तरह व्यक्तिगत हैं और पार्टी उनका समर्थन नहीं करती।

भाजपा नेता की टिप्पणी को तृणमूल ने नया राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। पार्टी इसे बंगाल की राष्ट्रवादी विरासत और नेताजी के सम्मान पर हमला बताते हुए मुद्दा उठा रही है।

मंगलवार को कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग आयोजन स्थल के पास एकत्र हुए और ममता बनर्जी के खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए, जिससे कुछ समय के लिए कार्यक्रम बाधित हुआ। ये नारे हालीशहर की घटना के महज दो दिन बाद लगाए गए, जहां उत्तर 24 परगना जिले में ममता बनर्जी के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था।

बनर्जी ने कार्यक्रम के दौरान अपना ध्यान स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों पर केंद्रित रखा। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और मातंगिनी हाजरा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी केवल ‘दिखावे’ के लिए कार्यक्रम आयोजित नहीं करती, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान दिल से करती है।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि श्यामबाजार में हुआ विरोध प्रदर्शन भाजपा समर्थित लोगों की ओर से जानबूझकर आयोजित किया गया था, ताकि कार्यक्रम को बाधित किया जा सके और ममता बनर्जी का अपमान किया जा सके।

वहीं, भाजपा ने हालीशहर की घटना में अपनी भूमिका से इनकार किया है। भाजपा नेताओं ने इसे ममता बनर्जी के खिलाफ जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति बताया है।

रविवार को प्रदर्शनकारियों ने उस समय ममता बनर्जी के वाहन को घेर लिया था, जब वह उस तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गई थीं जिसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए थे और कथित तौर पर कीचड़ व चप्पलें भी फेंकी थीं।

पुलिसकर्मियों ने ममता बनर्जी के वाहन के चारों ओर घेरा बना लिया था, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर रास्ता रोक दिया था। इससे उनका दौरा राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन का केंद्र बन गया था।

ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना में सत्तारूढ़ दल की संलिप्तता से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि यह मुख्यमंत्री के खिलाफ ‘जनता के भारी गुस्से’ को दर्शाता है।

कुछ ही दिनों के भीतर कोलकाता में इसी तरह के नारे लगने और वह भी ममता बनर्जी की मौजूदगी वाले तृणमूल के कार्यक्रम में ऐसी घटनाएं होने से इनका राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।

तृणमूल कांग्रेस इन घटनाओं को ममता बनर्जी के कार्यक्रमों को बाधित करने और उनकी छवि खराब करने की राजनीतिक साजिश बता रही है, जबकि भाजपा इन्हें ममता सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी के रूप में पेश कर रही है।

नेताजी को लेकर हुई टिप्पणी को तृणमूल ने उनकी विरासत की रक्षा से जोड़ दिया है, वहीं ममता बनर्जी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों ने भ्रष्टाचार के आरोपों और जनता में असंतोष के मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

भाषा अमित नरेश

नरेश


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